फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Kangra News ›   टांडा अस्पताल में चिकित्सकों के 90 पद खाली

टांडा अस्पताल में चिकित्सकों के 90 पद खाली

Wed, 14 Mar 2018 10:45 PM IST
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:45 PM IST
विज्ञापन
टांडा अस्पताल में चिकित्सकों के 90 पद खाली
टांडा अस्पताल में नहीं पूरा स्टाफ, कौन करे इलाज
विज्ञापन

रोजाना होती है सैकड़ों की ओपीडी
मरीजों को होती है भारी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। केंद्र और राज्य सरकार ने बजट में मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सा बीमा योजना का प्रावधान किया है। लेकिन विडंबना है कि प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े टांडा अस्पताल में स्टाफ ही पूरा नहीं है। ऐसे में मरीजों के इलाज की क्या कल्पना की जा सकती है। हालात यह हैं कि सूबे के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल टांडा में चिकित्सकों के 90 पद खाली चल रहे हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चिकित्सकों के 327 पद सृजित हैं। इसमें 237 पदों पर चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल की विभिन्न ओपीडी में प्रतिदिन 2200 के आसपास मरीज जांच करवाने पहुंचते हैं। कई बार दिन में चार मरीज रेफर किए जाते हैं। कई बार चार-चार दिन तक एक भी मरीज रेफर नहीं किया जाता है। अस्पताल में सिर्फ उन्हीं मरीजों को पीजीआई रेफर किया जाता है, जिनकी स्थिति ज्यादा नाजुक हो। वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ का भी टांडा कॉलेज में टोटा चल रहा है। आईजीएमसी की अपेक्षा यहां पर 800 कम कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। आईजीएमसी में 2100 पैरामेडिकल स्टाफ तैनात है, जबकि टांडा मेडिकल कॉलेज में 1300 कर्मचारी ही सेवाएं दे रहे हैं।
गायनी ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़
कांगड़ा जिले के विभिन्न अस्पतालों में सिर्फ दो गायनी विशेषज्ञ तैनात हैं। इसके कारण टांडा अस्पताल की गायनी ओपीडी में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। गायनी वार्ड में ऐसा कोई ही दिन होगा, जब एक बेड में एक ही महिला उपचारधीन हो। आमतौर पर एक बेड पर दो-दो महिलाएं दाखिल होती हैं।
विज्ञापन

तीमारदारों के ठहरने का नहीं उचित प्रबंध
टांडा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मरीजों के साथ आए तीमारदारों के ठहरने के लिए कोई उचित प्रबंध नहीं हैं। इससे मरीज के साथ आए परिजनों को अस्पताल के फर्श पर ही रात गुजारनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

टांडा अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने कहा कि मरीजों को हर सुविधा मुहैया करवाने का प्रयास किया जाता है। यहां मरीज की स्थिति को देखकर उसे रेफर किया जाता है।

मरीज बोले : टांडा में इलाज के बदले मिलती है टेंशन
सर्जरी विभाग में चेकअप करवाने पहुंचे शाहपुर निवासी कुलदीप का कहना है कि टांडा में इलाज करवाना सच में टेंशन लेने का काम है। मरीज के साथ तीमारदार न हो तो हालत वैसे ही खराब हो जाए। ओपीडी में इलाज को खड़ी निशा सांस से संबंधित समस्या को लेकर पहुंची हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर से चेकअप तो करवा लिया लेकिन जो टेस्ट लिखे हैं, उनकी रिपोर्ट आने के बाद दोबारा जाना पड़ेगा। उसे यहां तीन घंटे हो चुके हैं और कितना समय लगेगा पता नहीं। मेडिसिन विभाग में जांच को आई कृष्णा देवी ने कहा कि सुबह आकर पहले पर्ची बनवाने का झंझट और अब डॉक्टर के पास पहुंचने का। चार घंटे हो गए, नंबर कब आएगा पता नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed