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ज्वालामुखी मंदिर में दूसरे नवरात्र में चढ़ा तीन लाख का चढ़ावा
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चामुंडा माता मंदिर में बुधवार को कम दिखी श्रद्धालुओं की भीड़।
- फोटो : Kangra
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ज्वालामुखी/कांगड़ा। ज्वालामुखी शक्तिपीठ में श्रावण अष्टमी नवरात्र के दूसरे नवरात्र में भक्तों ने मां के चरणों में कुल मिलाकर तीन लाख सात हजार 612 रुपये का नकद चढ़ावा अर्पित किया।
इसके अलावा भक्तों ने एक ग्राम 100 मिलीग्राम सोना, 43 ग्राम चांदी और 20 डॉलर भी माता के चरणों में अर्पित किए। मंदिर अधिकारी तहसीलदार निर्मल सिंह ठाकुर ने बताया कि तीसरे नवरात्र पर करीब सात हजार श्रद्धालुओं ने मां की पावन और अखंड ज्योतियों के दर्शन कर पुण्य फल प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि बिना कोविड रिपोर्ट और वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र पहुंचे लगभग 500 श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही लौटे।
ज्वालामुखी के चार जगह लगे नाकों पर बिना कोविड रिपोर्ट या बिना वैक्सीन सर्टिफिकेट के श्रद्धालु दर्शनों को नहीं भेजे जा रहे हैं। ज्वालामुखी में बाजारों की रौनक गायब है और उम्मीद से कम श्रद्धालु इन नवरात्रों में नजर आ रहे हैं। वहीं, मंदिर प्रशासन की तरफ से पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। कोविड नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।
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वहीं, शक्तिपीठ बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में तीसरे नवरात्र मेले में दो हजार श्रद्धालुओं ने देवी दर्शन किए। मंदिर अधिकारी दिलजीत शर्मा ने बताया कि दूसरे नवरात्र मेले में यात्रियों ने 71 हजार 931 रुपये की चढ़त चढ़ाई। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कोविड गाइडलाइन का पूरा पालन करवाया जा रहा है।
चामुंडा मंदिर में कम श्रद्धालु आने से दुकानदार मायूस
चामुंडा (कांगड़ा)। श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में श्रावण अष्टमी के तीसरे नवरात्र पर कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचने से दुकानदारों के चेहरे लटके रहे। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सीमाओं पर सरकारी आदेशों का कड़ाई से पालन हो रहा है। वहीं, यह देखा जा रहा है कि पंजाब मूल के ज्यादातर श्रद्धालुओं ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है और न ही कोविड टेस्ट करवाया है। इसके परिणाम स्वरूप चामुंडा मंदिर से कई श्रद्धालुओं को बिना दर्शनों के लौटा देने का सिलसिला जारी है। तीसरे नवरात्र में 900 श्रद्धालु मां चामुंडा के दरबार में नतमस्तक हुए और नियमों का पालन न करने वाले 60 श्रद्धालुओं को बिना प्रमाण पत्र के वापस भेजा गया । वहीं, दुकानदार भी सकते में हैं कि उन्होंने बताया कि डेढ़ साल के सूखे को दूर करने के लिए हमने उधार और लोन लेकर अपनी दुकानों में सामान डाला था, परंतु श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने से इस सामान का क्या करेंगे। बैंक और लोगों को उधार कहां से वापस करेंगे। अपने परिवार को क्या खिलाएंगे।
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इसके अलावा भक्तों ने एक ग्राम 100 मिलीग्राम सोना, 43 ग्राम चांदी और 20 डॉलर भी माता के चरणों में अर्पित किए। मंदिर अधिकारी तहसीलदार निर्मल सिंह ठाकुर ने बताया कि तीसरे नवरात्र पर करीब सात हजार श्रद्धालुओं ने मां की पावन और अखंड ज्योतियों के दर्शन कर पुण्य फल प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि बिना कोविड रिपोर्ट और वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र पहुंचे लगभग 500 श्रद्धालु बिना दर्शन किए ही लौटे।
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ज्वालामुखी के चार जगह लगे नाकों पर बिना कोविड रिपोर्ट या बिना वैक्सीन सर्टिफिकेट के श्रद्धालु दर्शनों को नहीं भेजे जा रहे हैं। ज्वालामुखी में बाजारों की रौनक गायब है और उम्मीद से कम श्रद्धालु इन नवरात्रों में नजर आ रहे हैं। वहीं, मंदिर प्रशासन की तरफ से पूरी तरह सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद है। कोविड नियमों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।
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वहीं, शक्तिपीठ बज्रेश्वरी मंदिर कांगड़ा में तीसरे नवरात्र मेले में दो हजार श्रद्धालुओं ने देवी दर्शन किए। मंदिर अधिकारी दिलजीत शर्मा ने बताया कि दूसरे नवरात्र मेले में यात्रियों ने 71 हजार 931 रुपये की चढ़त चढ़ाई। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। कोविड गाइडलाइन का पूरा पालन करवाया जा रहा है।
चामुंडा मंदिर में कम श्रद्धालु आने से दुकानदार मायूस
चामुंडा (कांगड़ा)। श्री चामुंडा नंदीकेश्वर धाम में श्रावण अष्टमी के तीसरे नवरात्र पर कम संख्या में श्रद्धालु पहुंचने से दुकानदारों के चेहरे लटके रहे। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सीमाओं पर सरकारी आदेशों का कड़ाई से पालन हो रहा है। वहीं, यह देखा जा रहा है कि पंजाब मूल के ज्यादातर श्रद्धालुओं ने कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाई है और न ही कोविड टेस्ट करवाया है। इसके परिणाम स्वरूप चामुंडा मंदिर से कई श्रद्धालुओं को बिना दर्शनों के लौटा देने का सिलसिला जारी है। तीसरे नवरात्र में 900 श्रद्धालु मां चामुंडा के दरबार में नतमस्तक हुए और नियमों का पालन न करने वाले 60 श्रद्धालुओं को बिना प्रमाण पत्र के वापस भेजा गया । वहीं, दुकानदार भी सकते में हैं कि उन्होंने बताया कि डेढ़ साल के सूखे को दूर करने के लिए हमने उधार और लोन लेकर अपनी दुकानों में सामान डाला था, परंतु श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आने से इस सामान का क्या करेंगे। बैंक और लोगों को उधार कहां से वापस करेंगे। अपने परिवार को क्या खिलाएंगे।