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मौत की दरकती पहाड़ी से श्रद्धालुओं में दहशत
Updated Tue, 18 Jul 2017 12:15 AM IST
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कपिल शर्मा
ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी में मुख्य मंदिर मार्ग पर 10 सालों से दरकती पहाड़ी को रोकने के लिए प्रशासन ने आज तक डंगा नहीं लगाया है। 12 अगस्त 2007 को मुख्य मंदिर मार्ग ज्वालामुखी में सुबह करीब 8:30 बजे पहाड़ी दरकी थी, जिसमें पत्थर और चट्टानें टूट कर नीचे आ गिरी थीं। इससे मंदिर मार्ग पर दर्जनों दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं और स्थानीय लोगों की हादसे में मौतें भी हुई थीं। लेकिन, 10 सालों से हालात जस के तस हैं। पहाड़ी की मरम्मत या डंगा लगाने के लिए धरातल पर कोई भी प्रशासनिक तौर पर प्लान तैयार नहीं किया गया। इसके चलते इस पहाड़ी को लोग मौत की पहाड़ी का नाम देते हैं, जो हादसे के लिए अति संवेदनशील है। बरसात में अक्सर पहाड़ी दरकने का खतरा बना रहता है। कई बार इस मार्ग को पहाड़ से पत्थर गिरने के चलते बंद किया गया है। श्रावण अष्टमी मेलों में भी भारी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए इसी मार्ग से जाते हैं। मंदिर प्रशासन ने सूचना बोर्ड लगाकर जिम्मेदारी से भाग रहा है। समाजसेवी एवं पूर्व न्यास सदस्य प्रताप चौधरी, कमल किशोर का कहना है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को पहाड़ी पर डंगा लगाने की योजना तैयार कर उसे अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए।
वहीं, ज्वालामुखी मंदिर मार्ग पर पहाड़ी की तरफ प्रवासियों ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर दर्जनों अस्थायी दुकानें बना रखी हैं। यदि कोई अनहोनी भारी बरसात में होती है तो प्रवासियों की दुकानों के साथ प्रवासी भी अप्रिय दुर्घटना का शिकार होने से बच नहीं पाएंगे।
पहाड़ी की ओर लोहे की तार लगवाई जाएगी : राकेश
ज्वालामुखी के सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम राकेश कुमार का कहना है कि मंदिर मार्ग पर पहाड़ी से पत्थरों को गिरने से रोकने के लिए मंदिर प्रशासन को जल्द लोहे की तार लगाने की निर्देश दिए गए हैं।
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उचित कदम उठाएंगे : कंचन बाला
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कंचन बाला का कहना है कि मामले को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे। शहर और मंदिर मार्ग में अतिक्रमण पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी में मुख्य मंदिर मार्ग पर 10 सालों से दरकती पहाड़ी को रोकने के लिए प्रशासन ने आज तक डंगा नहीं लगाया है। 12 अगस्त 2007 को मुख्य मंदिर मार्ग ज्वालामुखी में सुबह करीब 8:30 बजे पहाड़ी दरकी थी, जिसमें पत्थर और चट्टानें टूट कर नीचे आ गिरी थीं। इससे मंदिर मार्ग पर दर्जनों दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं और स्थानीय लोगों की हादसे में मौतें भी हुई थीं। लेकिन, 10 सालों से हालात जस के तस हैं। पहाड़ी की मरम्मत या डंगा लगाने के लिए धरातल पर कोई भी प्रशासनिक तौर पर प्लान तैयार नहीं किया गया। इसके चलते इस पहाड़ी को लोग मौत की पहाड़ी का नाम देते हैं, जो हादसे के लिए अति संवेदनशील है। बरसात में अक्सर पहाड़ी दरकने का खतरा बना रहता है। कई बार इस मार्ग को पहाड़ से पत्थर गिरने के चलते बंद किया गया है। श्रावण अष्टमी मेलों में भी भारी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए इसी मार्ग से जाते हैं। मंदिर प्रशासन ने सूचना बोर्ड लगाकर जिम्मेदारी से भाग रहा है। समाजसेवी एवं पूर्व न्यास सदस्य प्रताप चौधरी, कमल किशोर का कहना है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन को पहाड़ी पर डंगा लगाने की योजना तैयार कर उसे अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए।
वहीं, ज्वालामुखी मंदिर मार्ग पर पहाड़ी की तरफ प्रवासियों ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर दर्जनों अस्थायी दुकानें बना रखी हैं। यदि कोई अनहोनी भारी बरसात में होती है तो प्रवासियों की दुकानों के साथ प्रवासी भी अप्रिय दुर्घटना का शिकार होने से बच नहीं पाएंगे।
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पहाड़ी की ओर लोहे की तार लगवाई जाएगी : राकेश
ज्वालामुखी के सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम राकेश कुमार का कहना है कि मंदिर मार्ग पर पहाड़ी से पत्थरों को गिरने से रोकने के लिए मंदिर प्रशासन को जल्द लोहे की तार लगाने की निर्देश दिए गए हैं।
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उचित कदम उठाएंगे : कंचन बाला
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कंचन बाला का कहना है कि मामले को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे। शहर और मंदिर मार्ग में अतिक्रमण पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।