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पहाड़ों में भारी बारिश ने फेरा एनएचएआई की मेहनत पर पानी
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चक्की खड्ड में बाढ़ आने से फंसे लोगों को क्रेन के सहारे निकालते हुए। -संवाद
कंडवाल (कांगड़ा)। एनएच 154 पर बने चक्की पुल को सुरक्षित करने के लिए पानी का बहाव बदलने में जुटी एनएचएआई की टीम की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। चक्की खड्ड में रविवार को पानी का बहाव बदलने में लगे 35 कामगारों की जान उस समय संकट में आ गई, जब अचानक बाढ़ आ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों कहना है कि खड्ड में बरसात में एकदम से पहली बार इतना पानी आया। एनएचएआई को खतरे में आईं 35 जिंदगियों को बचाने के लिए क्रेनों का सहारा लेना पड़ा। शाम 5:40 के करीब बाढ़ आई और 6:05 बजे तक पुल के नीचे और ऊपर क्रेनें लगाकर इन लोगं को रेस्क्यू किया गया।
दिन में डायवर्ट कर दिया था पानी, शाम को बाढ़ सब बहा ले गई
इधर, करीब एक हफ्ते से जारी प्रयासों से पानी का बहाव बदलने में रविवार को काफी हद तक सफलता मिल गई थी। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद खड्ड में आई बाढ़ के कारण मशीनें लगाकर बनाई गई रोक तेज बहाव में बह गई।
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पहाड़ों में बारिश के चलते चक्की खड्ड में पानी का बहाव बदलने में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। इसके कारण पुल के नीचे पिलरों के साथ बने गड्ढे लगातार गहरे होते जा रहे हैं। ऐसे में पुल की सुरक्षा के लिए पानी को डायवर्ट करने के लिए कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। कंपनी की तीन पोकलेन के सहारे मुश्किल हो चुके कार्य को पूरा करने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने सेना के सहयोग के लिए निवेदन किया था। ऐसे में सेना की तरफ से भी अपनी तीन पोकलेन मशीनें चक्की खड्ड में पानी का बहाव बदलने के लिए लगाई गई हैं।
एनएचएआई पालमपुर कार्यालय के प्रोजेक्टिंग डायरेक्टर कर्नल अनिल सेन ने बताया कि काम युद्ध स्तर पर लगा हुआ है। हमारी पूरी कोशिश है कि हम पुल के पिलरों को बचा लेंगे। पहाड़ों में जारी बारिश के कारण कार्य में बाधा आ रही है।
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प्रत्यक्षदर्शियों कहना है कि खड्ड में बरसात में एकदम से पहली बार इतना पानी आया। एनएचएआई को खतरे में आईं 35 जिंदगियों को बचाने के लिए क्रेनों का सहारा लेना पड़ा। शाम 5:40 के करीब बाढ़ आई और 6:05 बजे तक पुल के नीचे और ऊपर क्रेनें लगाकर इन लोगं को रेस्क्यू किया गया।
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दिन में डायवर्ट कर दिया था पानी, शाम को बाढ़ सब बहा ले गई
इधर, करीब एक हफ्ते से जारी प्रयासों से पानी का बहाव बदलने में रविवार को काफी हद तक सफलता मिल गई थी। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद खड्ड में आई बाढ़ के कारण मशीनें लगाकर बनाई गई रोक तेज बहाव में बह गई।
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पहाड़ों में बारिश के चलते चक्की खड्ड में पानी का बहाव बदलने में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। इसके कारण पुल के नीचे पिलरों के साथ बने गड्ढे लगातार गहरे होते जा रहे हैं। ऐसे में पुल की सुरक्षा के लिए पानी को डायवर्ट करने के लिए कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। कंपनी की तीन पोकलेन के सहारे मुश्किल हो चुके कार्य को पूरा करने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों ने सेना के सहयोग के लिए निवेदन किया था। ऐसे में सेना की तरफ से भी अपनी तीन पोकलेन मशीनें चक्की खड्ड में पानी का बहाव बदलने के लिए लगाई गई हैं।
एनएचएआई पालमपुर कार्यालय के प्रोजेक्टिंग डायरेक्टर कर्नल अनिल सेन ने बताया कि काम युद्ध स्तर पर लगा हुआ है। हमारी पूरी कोशिश है कि हम पुल के पिलरों को बचा लेंगे। पहाड़ों में जारी बारिश के कारण कार्य में बाधा आ रही है।