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भवनों के अधिग्रहण का एक समान मुआवजा दें सरकार
Updated Sat, 17 Nov 2018 11:45 PM IST
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फोरलेन की जद में आई जमीन पर बने भवनों का एक समान मुआवजा दे सरकार
मुआवज की दर अलग-अलग तय करने पर बिफरे फोरलेन प्रभावित
जसूर में पठानकोट-मंडी फोरलेन संघर्ष समिति के नूरपुर जोन की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
जसूर (कांगड़ा)। पठानकोट-मंडी फोरलेन संघर्ष समिति के नूरपुर जोन की बैठक जसूर में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष दरबारी लाल ने की। उन्होंने कहा कि फोरलेन की जद में आने वाली जमीन में बने भवनों के अधिग्रहण के लिए मुआवजे की अलग-अलग दर न अपनाई जाए। सभी प्रभावितों को एक ही दर पर मुआवजा दिया जाए, क्योंकि वर्तमान समय में नए भवन और आवास बनाने के लिए काफी लागत उठानी पड़ेगी। भूमि की कीमत और निर्माण दर आज के समय में बहुत ज्यादा है। सरकार की ओर से भवनों के अधिग्रहण को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए गए तो इससे अधिकतर प्रभावित नए घर का निर्माण नहीं कर पाएंगे। इस कारण वे सड़कों पर आ जाएंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि मुआवजे की दर प्रोजेक्ट की भूमि अधिग्रहण और राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अलग होनी चाहिए, क्योंकि सड़क के किनारे व्यावहारिक तौर 500 मीटर तक की भूमि का रेट कामर्शियल तौर पर ही माना जाता है तथा सरकार का राजस्व विभाग इस प्रकार की जमीन की रजिस्ट्री करते समय बारिश स्टांप ड्यूटी वसूल करता है। उन्होंने संतोष जताया कि प्रदेश सरकार ने फैक्टर-दो के तहत मुआवजा दिए जाने का संकेत दिया है। जिला प्रशासन ने मुआवजे की दरों में वृद्धि भी की गई है, लेकिन समिति सरकार से मुआवजे की दर एक समान देने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि कंडवाल से नूरपुर तक एनएच पर जमीन के रेट लगभग एक समान है।
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मुआवज की दर अलग-अलग तय करने पर बिफरे फोरलेन प्रभावित
जसूर में पठानकोट-मंडी फोरलेन संघर्ष समिति के नूरपुर जोन की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
जसूर (कांगड़ा)। पठानकोट-मंडी फोरलेन संघर्ष समिति के नूरपुर जोन की बैठक जसूर में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष दरबारी लाल ने की। उन्होंने कहा कि फोरलेन की जद में आने वाली जमीन में बने भवनों के अधिग्रहण के लिए मुआवजे की अलग-अलग दर न अपनाई जाए। सभी प्रभावितों को एक ही दर पर मुआवजा दिया जाए, क्योंकि वर्तमान समय में नए भवन और आवास बनाने के लिए काफी लागत उठानी पड़ेगी। भूमि की कीमत और निर्माण दर आज के समय में बहुत ज्यादा है। सरकार की ओर से भवनों के अधिग्रहण को लेकर दोहरे मापदंड अपनाए गए तो इससे अधिकतर प्रभावित नए घर का निर्माण नहीं कर पाएंगे। इस कारण वे सड़कों पर आ जाएंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि मुआवजे की दर प्रोजेक्ट की भूमि अधिग्रहण और राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अलग होनी चाहिए, क्योंकि सड़क के किनारे व्यावहारिक तौर 500 मीटर तक की भूमि का रेट कामर्शियल तौर पर ही माना जाता है तथा सरकार का राजस्व विभाग इस प्रकार की जमीन की रजिस्ट्री करते समय बारिश स्टांप ड्यूटी वसूल करता है। उन्होंने संतोष जताया कि प्रदेश सरकार ने फैक्टर-दो के तहत मुआवजा दिए जाने का संकेत दिया है। जिला प्रशासन ने मुआवजे की दरों में वृद्धि भी की गई है, लेकिन समिति सरकार से मुआवजे की दर एक समान देने की मांग करती है। उन्होंने कहा कि कंडवाल से नूरपुर तक एनएच पर जमीन के रेट लगभग एक समान है।