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अब किसानों के उत्पाद पर पैसा नहीं कमा पाएंगे बिचौलिये
Updated Wed, 09 May 2018 12:25 AM IST
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अब किसानों की फसल पर पैसा नहीं कमा पाएंगे बिचौलिए
उत्पाद बेचने के लिए गुजरात का सेवा मॉडल फॉलो करेगा हिमाचल
पहले चरण में सूबे के पांच जिलों के लिए गठित होगी संस्था
हरीश चंद्र
धर्मशाला। अब किसानों के उत्पाद पर बिचौलिए पैसे नहीं कमा पाएंगे। किसानों को उत्पाद बेचने के लिए जायका परियोजना के तहत गुजरात की सेल्फ इंप्लाइड वूमेन एसोसिएशन (सेवा) की तर्ज तक एक संस्था का गठन किया जाएगा। इसके बाद किसानों, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सीधे मार्केट में बेचा जाएगा।
बिचौलिए की इसमें कोई भूमिका नहीं रहेगी और लोगों को अपने उत्पाद के अच्छे दाम मिलेंगे। इससे किसानों और महिलाओं की आर्थिकी सुदृढ़ होगी। धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन देश के सभी प्रदेशों, जहां जायका परियोजना के तहत काम किए जाते हैं, उन्होंने अपने-अपने प्रदेश में हुए कामों को सभी प्रतिनिधियों के समक्ष रखा। इसमें हिमाचल की जायजा टीम ने गुजरात के सेवा मॉडल को फॉलो करने की योजना बनाई है। सेवा संस्था की तर्ज पर हिमाचल के पांच जिलों जहां जायका परियोजना के तहत काम किया जा रहा है, वहां के किसानों के उत्पाद बेचने के लिए संस्था का गठन किया जाएगा। बता दें कि वर्तमान में प्रदेश के कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना जिला में जायका परियोजना के 321 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है, जो अगले दो साल में पूरा होना है।
बाक्स
सेवा की तर्ज पर ग्रुप एप्रोच में बेच जाएंगे उत्पाद
गुजरात की सेवा संस्था की तर्ज पर हिमाचल के किसानों और महिलाओं के उत्पादों को ग्रुप एप्रोच में बेचा जाएगा। सेवा संस्था भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, जापान सहित कई देशों में काम करती है और वहां उत्पाद बेचती है।
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उत्पाद बेचने के लिए गुजरात का सेवा मॉडल फॉलो करेगा हिमाचल
पहले चरण में सूबे के पांच जिलों के लिए गठित होगी संस्था
हरीश चंद्र
धर्मशाला। अब किसानों के उत्पाद पर बिचौलिए पैसे नहीं कमा पाएंगे। किसानों को उत्पाद बेचने के लिए जायका परियोजना के तहत गुजरात की सेल्फ इंप्लाइड वूमेन एसोसिएशन (सेवा) की तर्ज तक एक संस्था का गठन किया जाएगा। इसके बाद किसानों, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को सीधे मार्केट में बेचा जाएगा।
बिचौलिए की इसमें कोई भूमिका नहीं रहेगी और लोगों को अपने उत्पाद के अच्छे दाम मिलेंगे। इससे किसानों और महिलाओं की आर्थिकी सुदृढ़ होगी। धर्मशाला में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन देश के सभी प्रदेशों, जहां जायका परियोजना के तहत काम किए जाते हैं, उन्होंने अपने-अपने प्रदेश में हुए कामों को सभी प्रतिनिधियों के समक्ष रखा। इसमें हिमाचल की जायजा टीम ने गुजरात के सेवा मॉडल को फॉलो करने की योजना बनाई है। सेवा संस्था की तर्ज पर हिमाचल के पांच जिलों जहां जायका परियोजना के तहत काम किया जा रहा है, वहां के किसानों के उत्पाद बेचने के लिए संस्था का गठन किया जाएगा। बता दें कि वर्तमान में प्रदेश के कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर और ऊना जिला में जायका परियोजना के 321 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जा रहा है, जो अगले दो साल में पूरा होना है।
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सेवा की तर्ज पर ग्रुप एप्रोच में बेच जाएंगे उत्पाद
गुजरात की सेवा संस्था की तर्ज पर हिमाचल के किसानों और महिलाओं के उत्पादों को ग्रुप एप्रोच में बेचा जाएगा। सेवा संस्था भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, जापान सहित कई देशों में काम करती है और वहां उत्पाद बेचती है।
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