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शास्त्री अध्यापकों ने मांगा टीजीटी संस्कृत पदनाम
Updated Thu, 11 Jan 2018 11:29 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने संस्कृत शिक्षकों (शास्त्री) को टीजीटी संस्कृत पदनाम प्रदान करने की मांग की है। संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिला।
परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि शास्त्री अध्यापक की जिस पद पर नियुक्ति होती है, वह उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाता है। उन्होंने संस्कृत अध्यापकों पर लगाई बीएड की शर्त को हटाकर इस वर्ग को पदोन्नति देने की मांग की। संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरवंश सिपहिया ने बताया कि हिमाचल सरकार ने 1992 में बिना बीएड नियुक्त प्रवक्ताओं को वन टाइम छूट दी थी। इसी तर्ज पर इस वर्ग को छूट देकर पदोन्नति दी जाए। इस मौके पर संघ सदस्यों ने प्रदेश के सभी स्कूलों में जमा दो तक संस्कृत विषय को संस्कृत के विस्तार और संस्कारों के ज्ञान के मद्देनजर अनिवार्य बनाने का भी आग्रह किया। इस मौके पर अमित कुमार, अजय कुमार, देशराज, चंद्रभान, सूर्यभान, सुरेश शर्मा, विशाल, अश्वनी, राकेश, जीवन कुमार, केशव और संदीप आदि मौजूद रहे।
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नगरोटा बगवां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद ने संस्कृत शिक्षकों (शास्त्री) को टीजीटी संस्कृत पदनाम प्रदान करने की मांग की है। संघ का एक प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज से मिला।
परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि शास्त्री अध्यापक की जिस पद पर नियुक्ति होती है, वह उसी पद से सेवानिवृत्त हो जाता है। उन्होंने संस्कृत अध्यापकों पर लगाई बीएड की शर्त को हटाकर इस वर्ग को पदोन्नति देने की मांग की। संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष गुरवंश सिपहिया ने बताया कि हिमाचल सरकार ने 1992 में बिना बीएड नियुक्त प्रवक्ताओं को वन टाइम छूट दी थी। इसी तर्ज पर इस वर्ग को छूट देकर पदोन्नति दी जाए। इस मौके पर संघ सदस्यों ने प्रदेश के सभी स्कूलों में जमा दो तक संस्कृत विषय को संस्कृत के विस्तार और संस्कारों के ज्ञान के मद्देनजर अनिवार्य बनाने का भी आग्रह किया। इस मौके पर अमित कुमार, अजय कुमार, देशराज, चंद्रभान, सूर्यभान, सुरेश शर्मा, विशाल, अश्वनी, राकेश, जीवन कुमार, केशव और संदीप आदि मौजूद रहे।
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