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नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 10 साल कैद
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:44 PM IST
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धर्मशाला। नाबालिग लड़की को भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी पर दोष सिद्ध होने पर अदालत ने उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा दोषी को 30 हजार रुपये जुर्माना भी भरना होगा। यह सजा न्यायाधीश राजेश तोमर की विशेष अदालत ने सुनाई।
उप जिला न्यायवादी कपिल देव शर्मा ने बताया कि 11 दिसंबर 2013 को पुलिस थाना धर्मशाला में एक नाबालिग लड़की को भगाने का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस को दी शिकायत में जिला मुख्यालय के साथ लगते गांव की एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को उन्हीं के गांव का युवक भगाकर ले गया है। पुलिस ने इस संदर्भ में मामला दर्ज कर आगामी छानबीन शुरू की थी। 15 दिसंबर 2013 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि अजय नाबालिग युवती को लेकर श्यामनगर की तरफ जा रहा है। पुलिस ने मौके पर जाकर दोनों को पकड़ लिया। युवती की मां ने युवती की पहचान की, जिसके बाद युवती की मां की सहमति पर पुलिस ने युवक और युवती का मेडिकल करवाया। वहीं नाबालिग युवती के बयान भी उसकी मां की मौजूदगी में दर्ज किए गए। साथ ही उसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई। पुलिस छानबीन में यह बात भी सामने आई कि दोषी ने युवती के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए हैं। इसकी पुष्टि मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी हुई। वहीं युवती के सर्टिफिकेट के आधार पर युवती नाबालिग पाई गई। इसके बाद पुलिस ने दोषी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया।
उप जिला न्यायवादी ने बताया कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। वहीं गवाहों के बयानों और पुलिस के उपलब्ध करवाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी को आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 वर्ष साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। वहीं जुर्माना अदा नहीं करने की सूरत में दोषी को 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा अदालत ने पोक्सो एक्ट के तहत दोषी को 10 साल कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
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उप जिला न्यायवादी कपिल देव शर्मा ने बताया कि 11 दिसंबर 2013 को पुलिस थाना धर्मशाला में एक नाबालिग लड़की को भगाने का मामला दर्ज हुआ था। पुलिस को दी शिकायत में जिला मुख्यालय के साथ लगते गांव की एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी को उन्हीं के गांव का युवक भगाकर ले गया है। पुलिस ने इस संदर्भ में मामला दर्ज कर आगामी छानबीन शुरू की थी। 15 दिसंबर 2013 को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि अजय नाबालिग युवती को लेकर श्यामनगर की तरफ जा रहा है। पुलिस ने मौके पर जाकर दोनों को पकड़ लिया। युवती की मां ने युवती की पहचान की, जिसके बाद युवती की मां की सहमति पर पुलिस ने युवक और युवती का मेडिकल करवाया। वहीं नाबालिग युवती के बयान भी उसकी मां की मौजूदगी में दर्ज किए गए। साथ ही उसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई। पुलिस छानबीन में यह बात भी सामने आई कि दोषी ने युवती के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए हैं। इसकी पुष्टि मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी हुई। वहीं युवती के सर्टिफिकेट के आधार पर युवती नाबालिग पाई गई। इसके बाद पुलिस ने दोषी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया।
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उप जिला न्यायवादी ने बताया कि मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाह पेश किए गए। वहीं गवाहों के बयानों और पुलिस के उपलब्ध करवाए गए साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोषी को आईपीसी की धारा 363 के तहत 3 वर्ष साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। वहीं जुर्माना अदा नहीं करने की सूरत में दोषी को 6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा अदालत ने पोक्सो एक्ट के तहत दोषी को 10 साल कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जुर्माना राशि अदा नहीं करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भी भुगतना होगा।
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