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कागजों में खर्च हुई हैरिटेज विलेज के विकास कार्यों की धनराशि
Updated Sat, 11 Nov 2017 11:06 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
परागपुर (कांगड़ा)। हैरिटेज विलेज गरली और परागपुर में साइन बोर्ड न होने के कारण यहां आने वाले पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हैरिटेज विलेज में पहुंचने के लिए पर्यटकों को स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना पड़ता है। कई बार तो पर्यटक गलत दिशा में निकल जाते हैं। इससे पर्यटकों को हैरिटेज विलेज पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
साल 2007 में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव ने तत्कालीन उपायुक्त कांगड़ा एवं हैरिटेज विलेज कमेटी गरली परागपुर के अध्यक्ष को कलोहा और नैहरनपुखर सहित अन्य स्थल में हैरिटेज विलेज परागपुर और गरली को जाने के लिए दर्शाते साइन बोर्ड स्थापित करने के आदेश दिए थे। इसके लिए तीन लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की गई थी। कमेटी ने तीन लाख रुपये में से 36 हजार रुपये भी खर्च कर दिए, लेकिन किसी भी मार्ग पर कमेटी साइन बोर्ड नहीं लगा सकी। वहीं, पर्यटन विभाग ने टूरिस्ट लिटरेचर के लिए भी दो लाख रुपये स्वीकृत किए। उनमें से भी 32 हजार रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन उक्त लिटरेचर कहां पर रखा गया है। इसकी जानकारी न ही लोगों को है और न ही प्रशासन को। इसके अलावा पर्यटन विभाग ने होम स्टे की इंप्रूवमेंट के लिए भी तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे। कमेटी ने उक्त धनराशि से ज्यादा चार लाख 83 हजार रुपये उक्त कार्य पर खर्च डाले। इसकी जानकारी भी लोगों और कमेटी को नहीं है कि धन कहां पर खर्च किया गया। उधर, वाइस प्रेजिडेंट गरली-परागपुर हैरिटेज कमेटी मलोक सिंह ने बताया कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं कि सरकार ने जो धनराशि परागपुर और गरली हैरिटेज विलेज के लिए स्वीकृत की थी। उसे कहां पर खर्च किया गया। इस बारे में पर्यटन विभाग से मामले की असलियत जानने के लिए पत्राचार किया जाएगा ताकि हमें भी वास्तविकता का पता चल सके।
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परागपुर (कांगड़ा)। हैरिटेज विलेज गरली और परागपुर में साइन बोर्ड न होने के कारण यहां आने वाले पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हैरिटेज विलेज में पहुंचने के लिए पर्यटकों को स्थानीय लोगों से रास्ता पूछना पड़ता है। कई बार तो पर्यटक गलत दिशा में निकल जाते हैं। इससे पर्यटकों को हैरिटेज विलेज पहुंचने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
साल 2007 में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के सचिव ने तत्कालीन उपायुक्त कांगड़ा एवं हैरिटेज विलेज कमेटी गरली परागपुर के अध्यक्ष को कलोहा और नैहरनपुखर सहित अन्य स्थल में हैरिटेज विलेज परागपुर और गरली को जाने के लिए दर्शाते साइन बोर्ड स्थापित करने के आदेश दिए थे। इसके लिए तीन लाख रुपये की धनराशि भी स्वीकृत की गई थी। कमेटी ने तीन लाख रुपये में से 36 हजार रुपये भी खर्च कर दिए, लेकिन किसी भी मार्ग पर कमेटी साइन बोर्ड नहीं लगा सकी। वहीं, पर्यटन विभाग ने टूरिस्ट लिटरेचर के लिए भी दो लाख रुपये स्वीकृत किए। उनमें से भी 32 हजार रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन उक्त लिटरेचर कहां पर रखा गया है। इसकी जानकारी न ही लोगों को है और न ही प्रशासन को। इसके अलावा पर्यटन विभाग ने होम स्टे की इंप्रूवमेंट के लिए भी तीन लाख रुपये स्वीकृत किए थे। कमेटी ने उक्त धनराशि से ज्यादा चार लाख 83 हजार रुपये उक्त कार्य पर खर्च डाले। इसकी जानकारी भी लोगों और कमेटी को नहीं है कि धन कहां पर खर्च किया गया। उधर, वाइस प्रेजिडेंट गरली-परागपुर हैरिटेज कमेटी मलोक सिंह ने बताया कि मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं कि सरकार ने जो धनराशि परागपुर और गरली हैरिटेज विलेज के लिए स्वीकृत की थी। उसे कहां पर खर्च किया गया। इस बारे में पर्यटन विभाग से मामले की असलियत जानने के लिए पत्राचार किया जाएगा ताकि हमें भी वास्तविकता का पता चल सके।
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