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कोर्ट में लड़ी जाएगी पौंग गांध विस्थापितों के हक की लड़ाई: हंसराज
Updated Sun, 22 Apr 2018 11:17 PM IST
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कोर्ट में लड़ी जाएगी पौंग बांध विस्थापितों के हक की लड़ाई
जैसलमेर, मोहनगढ़ और रामगढ़ में दिए जा रहे मुरब्बे : हंसराज
अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक विश्रामगृह जवाली में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष हंसराज चौधरी ने की। हंस राज चौधरी ने कहा कि पौंग बांध बनने के समय लोगों ने अपनी बेशकीमती जमीनों की बलि दी थी। इसकी एवज में विस्थापितों को श्री गंगानगर में मूलभूत सुविधाओं से लेस भूमि देने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक विस्थापितों को जमीनें आवंटित नहीं हो पाई हैं।
राजस्थान सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल पाया है। इस समय जिन स्थानों पर विस्थापितों को जमीनें मिल रही हैं। वहां पर दूर-दूर तक कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। न तो पीने का पानी है और न ही स्कूल, कॉलेज, बिजली या अस्पताल हैं। पक्की सड़क सुविधा भी देखने को नहीं मिलती है। जमीनों तक पहुंचने के लिए आने-जाने का कोई साधन नहीं है। राजस्थान सरकार भी विस्थापितों के साथ नकारात्मक रवैया अपनाए हुए है। मौजूदा समय में विस्थापितों को हाई पावर कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध मुरब्बे मोहनगढ़, रामगढ़ और जैसलमेर में दिए जा रहे हैं। विस्थापितों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे अपने हकों के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस कार्य में देहरा के विधायक होशियार सिंह ने आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। बैठक में मदन मोहन, मदन लाल, साहिब सिंह, मदन लाल, देस राज, अनिल कुमार, प्यारे लाल, सुरेश कुमार, सुरेश कुमार, रशपाल ठाकुर, नंद किशोर, संजीव चौधरी और मेला राम आदि मौजूद रहे।
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जैसलमेर, मोहनगढ़ और रामगढ़ में दिए जा रहे मुरब्बे : हंसराज
अमर उजाला ब्यूरो
जवाली (कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापित समिति की बैठक विश्रामगृह जवाली में हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष हंसराज चौधरी ने की। हंस राज चौधरी ने कहा कि पौंग बांध बनने के समय लोगों ने अपनी बेशकीमती जमीनों की बलि दी थी। इसकी एवज में विस्थापितों को श्री गंगानगर में मूलभूत सुविधाओं से लेस भूमि देने की बात कही गई थी, लेकिन अभी तक विस्थापितों को जमीनें आवंटित नहीं हो पाई हैं।
राजस्थान सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल पाया है। इस समय जिन स्थानों पर विस्थापितों को जमीनें मिल रही हैं। वहां पर दूर-दूर तक कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। न तो पीने का पानी है और न ही स्कूल, कॉलेज, बिजली या अस्पताल हैं। पक्की सड़क सुविधा भी देखने को नहीं मिलती है। जमीनों तक पहुंचने के लिए आने-जाने का कोई साधन नहीं है। राजस्थान सरकार भी विस्थापितों के साथ नकारात्मक रवैया अपनाए हुए है। मौजूदा समय में विस्थापितों को हाई पावर कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरुद्ध मुरब्बे मोहनगढ़, रामगढ़ और जैसलमेर में दिए जा रहे हैं। विस्थापितों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे अपने हकों के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। इस कार्य में देहरा के विधायक होशियार सिंह ने आर्थिक सहायता देने का आश्वासन दिया है। बैठक में मदन मोहन, मदन लाल, साहिब सिंह, मदन लाल, देस राज, अनिल कुमार, प्यारे लाल, सुरेश कुमार, सुरेश कुमार, रशपाल ठाकुर, नंद किशोर, संजीव चौधरी और मेला राम आदि मौजूद रहे।
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