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आम के बागों में खिले उम्मीद के फूल
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:49 PM IST
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स्वरूप धीमान
कंडवाल (कांगडा)। आने वाले दिनों में मौसम ने साथ दिया तो आम की पैदावार में प्रदेश भर में अव्वल जिला कांगड़ा के आम उत्पादकों को बंपर फसल मिल सकती है। पिछले साल आम की फसल से करोड़ों रुपये का नुकसान झेल चुके आम उत्पादकों की उम्मीदें काफी कुछ मौसमी मिजाज पर टिक्की हैं।
आम उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले जिला कांगड़ा के सीमांत इलाके नूरपुर, इंदौरा, गंगथ, ज्वाली और फतेहपुर के बागवान आम की उम्दा फसल की पैदावार में अग्रणी माने जाते हैं, लेकिन, कुछ सालों से जिले के निचले इलाकों में पड़ रहे सूखे ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। वहीं इस बार ऑन ईयर होने के चलते आम की बंपर फसल से किसानों की जेबें भरेंगी। कांगड़ा जिले में कुल बागवानी की उपज 37,878 हेक्टेयर भूमि में से करीब 21,245 हेक्टेयर भूमि पर सिर्फ आम की फसल होती है। शेष में लीची 2712, नींबू प्रजाति 9465, अखरोट 812, सेब 454, अमरूद, आंवला और पपीता प्रजाति की 2012 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जबकि आम का गढ़ कहे जाने वाले नूरपुर क्षेत्र में 4167 और इंदौरा क्षेत्र में 6470 हेक्टेयर भूमि पर आम की पैदावार होती है। इलाके के रणबीर पठानिया, विकास, शेर सिंह, कर्ण, प्यार चौधरी, साक्ष्य, सोनू पठानिया, हरि सिंह, विजय सिंह और मंगल सिंह आदि बागवानों के अनुसार इस बार फ्लावरिंग अच्छी हुई है। इस कारण बंपर फसल की उम्मीद है।
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कंडवाल (कांगडा)। आने वाले दिनों में मौसम ने साथ दिया तो आम की पैदावार में प्रदेश भर में अव्वल जिला कांगड़ा के आम उत्पादकों को बंपर फसल मिल सकती है। पिछले साल आम की फसल से करोड़ों रुपये का नुकसान झेल चुके आम उत्पादकों की उम्मीदें काफी कुछ मौसमी मिजाज पर टिक्की हैं।
आम उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले जिला कांगड़ा के सीमांत इलाके नूरपुर, इंदौरा, गंगथ, ज्वाली और फतेहपुर के बागवान आम की उम्दा फसल की पैदावार में अग्रणी माने जाते हैं, लेकिन, कुछ सालों से जिले के निचले इलाकों में पड़ रहे सूखे ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। वहीं इस बार ऑन ईयर होने के चलते आम की बंपर फसल से किसानों की जेबें भरेंगी। कांगड़ा जिले में कुल बागवानी की उपज 37,878 हेक्टेयर भूमि में से करीब 21,245 हेक्टेयर भूमि पर सिर्फ आम की फसल होती है। शेष में लीची 2712, नींबू प्रजाति 9465, अखरोट 812, सेब 454, अमरूद, आंवला और पपीता प्रजाति की 2012 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है, जबकि आम का गढ़ कहे जाने वाले नूरपुर क्षेत्र में 4167 और इंदौरा क्षेत्र में 6470 हेक्टेयर भूमि पर आम की पैदावार होती है। इलाके के रणबीर पठानिया, विकास, शेर सिंह, कर्ण, प्यार चौधरी, साक्ष्य, सोनू पठानिया, हरि सिंह, विजय सिंह और मंगल सिंह आदि बागवानों के अनुसार इस बार फ्लावरिंग अच्छी हुई है। इस कारण बंपर फसल की उम्मीद है।
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