{"_id":"59dfac2f4f1c1bcd538b73ea","slug":"151507830831-kangra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कांगड़ा अस्पताल में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कांगड़ा अस्पताल में चरमराईं स्वास्थ्य सेवाएं
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:23 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांगड़ा। सिविल अस्पताल कांगड़ा में अब ताला लगाने की ही नौबत बची है। करीब पांच सौ की ओपीडी वाला यह अस्पताल महज एक चिकित्सक के हवाले रह गया है। अस्पताल से पिछले महीने
तीन विशेषज्ञ डॉक्टर सरकार ने तबदील कर दिए। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बिज और डॉ. पंकज का भी सरकार ने धर्मशाला तबादला कर दिया। दोनों यहां से रिलीव भी हो गए। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी समेत रात को आपातकालीन सेवाएं चरमरा गई हैं। दूरदराज क्षेत्रों से उपचार के लिए आ रहे रोगियों को अस्पताल पहुंचकर बिना डॉक्टरों के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में रोगियों को महंगे दाम पर उपचार करवाना पड़ रहा है। अस्पताल में अब नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनु शर्मा ही रह गई हैं। सोमवार को नाइट ड्यूटी होने के कारण वह भी मंगलवार को छुट्टी पर रहीं। डेपुटेशन पर आए चिकित्सक डॉ. अंकुश कपूर ने मरीजों का चेकअप किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और महज एक डॉक्टर के सहारे कांगड़ा विस क्षेत्र के एकमात्र सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर बन चुकी हैं। एक चिकित्सक के लिए सैकड़ों की ओपीडी संभालना मुश्किल हो रहा है। प्रदेश सरकार ने अस्पताल में डाक्टरों के आठ पद स्वीकृत किए हैं। पिछले डेढ़ महीने से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में रोगियों की संख्या में भी निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। इंटक नेता रमेश सैनी ने कहा कि स्टाफ से ज्यादा तो अस्पताल में सुरक्षा कर्मी देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दजूरदराज क्षेत्र इलाज करवाने पहुंच रहे रोगी परेशान हो रहे हैं। उन्हें या तो निजी अस्पतालों या फिर टांडा का रुख करना पड़ रहा है। रानीताल से अस्पताल में उपचार करवाने पहुंचे सीताराम और अशोक ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से उन्हें मायूस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार डॉक्टर तैनात नहीं कर सकती तो अस्पतालों पर ताला लटका देना चाहिए। उधर, कार्यवाहक एसएमओ डॉ. मनु शर्मा ने कहा कि अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर विभाग को सूचित कर दिया गया है।
विज्ञापन
तीन विशेषज्ञ डॉक्टर सरकार ने तबदील कर दिए। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बिज और डॉ. पंकज का भी सरकार ने धर्मशाला तबादला कर दिया। दोनों यहां से रिलीव भी हो गए। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी समेत रात को आपातकालीन सेवाएं चरमरा गई हैं। दूरदराज क्षेत्रों से उपचार के लिए आ रहे रोगियों को अस्पताल पहुंचकर बिना डॉक्टरों के परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में रोगियों को महंगे दाम पर उपचार करवाना पड़ रहा है। अस्पताल में अब नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनु शर्मा ही रह गई हैं। सोमवार को नाइट ड्यूटी होने के कारण वह भी मंगलवार को छुट्टी पर रहीं। डेपुटेशन पर आए चिकित्सक डॉ. अंकुश कपूर ने मरीजों का चेकअप किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और महज एक डॉक्टर के सहारे कांगड़ा विस क्षेत्र के एकमात्र सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर बन चुकी हैं। एक चिकित्सक के लिए सैकड़ों की ओपीडी संभालना मुश्किल हो रहा है। प्रदेश सरकार ने अस्पताल में डाक्टरों के आठ पद स्वीकृत किए हैं। पिछले डेढ़ महीने से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में रोगियों की संख्या में भी निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। इंटक नेता रमेश सैनी ने कहा कि स्टाफ से ज्यादा तो अस्पताल में सुरक्षा कर्मी देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दजूरदराज क्षेत्र इलाज करवाने पहुंच रहे रोगी परेशान हो रहे हैं। उन्हें या तो निजी अस्पतालों या फिर टांडा का रुख करना पड़ रहा है। रानीताल से अस्पताल में उपचार करवाने पहुंचे सीताराम और अशोक ने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से उन्हें मायूस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार डॉक्टर तैनात नहीं कर सकती तो अस्पतालों पर ताला लटका देना चाहिए। उधर, कार्यवाहक एसएमओ डॉ. मनु शर्मा ने कहा कि अस्पताल में स्टाफ की कमी को लेकर विभाग को सूचित कर दिया गया है।
विज्ञापन