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अंग्रेजों ने की खड़ी भाषा की दीवार : रजनीश
Updated Sun, 04 Feb 2018 12:17 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। भारत में अंग्रेजों ने अपने हित साधने के लिए यहां पर भाषा की दीवार खड़ी की। इतना ही नहीं आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने भी भाषायी आधार पर लोगों को वोट बैंक के तौर पर प्रयोग किया। शनिवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय के धौलाधार परिसर में सम्राट ललितादित्य व्याख्यानमाला में भाषा एवं अस्मिता विषय पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. रजनीश मिश्र ने कहा कि भारत में भाषा की समस्या इसलिए जटिल हुई। क्योंकि राजनीतिक ताकतों ने भाषायी समूहों का उपयोग वोट बैंक के रूप में किया। इससे देश में आजादी के 70 सालों बाद भी भाषा की समस्या बनी हुई है। अंग्रेजी को दिए गए 15 साल की छूट अब तक खत्म नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि सत्तासीन ताकतें भाषा की ताकत का उपयोग अपने हितों के लिए करना चाहती हैं। भारत भाषायी दृष्टि से समृद्ध रहा है, लेकिन यहां पर कभी भी भाषाओं के बीच विरोध और वैमनस्य का इतिहास नहीं मिलता। अंग्रेजों के आने के बाद उन्होंने जानबूझकर भारत में भाषाओं के बीच दीवार खड़ी की। भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। यह चिंतन का भी माध्यम है। इस मौके पर व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ. जेपी सिंह, डॉ. कुलदीप शुक्ल, डॉ अमित, डॉ चंद्रकांत सिंह सहित शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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धर्मशाला। भारत में अंग्रेजों ने अपने हित साधने के लिए यहां पर भाषा की दीवार खड़ी की। इतना ही नहीं आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने भी भाषायी आधार पर लोगों को वोट बैंक के तौर पर प्रयोग किया। शनिवार को केंद्रीय विश्वविद्यालय के धौलाधार परिसर में सम्राट ललितादित्य व्याख्यानमाला में भाषा एवं अस्मिता विषय पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. रजनीश मिश्र ने कहा कि भारत में भाषा की समस्या इसलिए जटिल हुई। क्योंकि राजनीतिक ताकतों ने भाषायी समूहों का उपयोग वोट बैंक के रूप में किया। इससे देश में आजादी के 70 सालों बाद भी भाषा की समस्या बनी हुई है। अंग्रेजी को दिए गए 15 साल की छूट अब तक खत्म नहीं हो पाई है।
उन्होंने कहा कि सत्तासीन ताकतें भाषा की ताकत का उपयोग अपने हितों के लिए करना चाहती हैं। भारत भाषायी दृष्टि से समृद्ध रहा है, लेकिन यहां पर कभी भी भाषाओं के बीच विरोध और वैमनस्य का इतिहास नहीं मिलता। अंग्रेजों के आने के बाद उन्होंने जानबूझकर भारत में भाषाओं के बीच दीवार खड़ी की। भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है। यह चिंतन का भी माध्यम है। इस मौके पर व्याख्यानमाला के संयोजक डॉ. जेपी सिंह, डॉ. कुलदीप शुक्ल, डॉ अमित, डॉ चंद्रकांत सिंह सहित शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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