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आठ साल के बाद भी नियमित नहीं हुए मनरेगा के कनिष्ठ लेखापाल

Mon, 07 Jan 2019 11:49 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jan 2019 11:49 PM IST
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आठ साल के बाद भी नियमित नहीं हुए मनरेगा के कनिष्ठ लेखापाल
ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज किए जाएं मनरेगा के कनिष्ठ लेखापाल
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संघ ने स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार के समक्ष उठाईं मांगें
अमर उजाला ब्यूरो
पालमपुर (कांगड़ा)। प्रदेश ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग में कार्यरत कनिष्ठ लेखापाल संघ ने स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार के समक्ष अपनी मांगें उठाईं। संघ ने एक ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा है। संघ ने मांग उठाई कि मनरेगा के कनिष्ठ लेखापालों को नियमित करके ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज किया जाए।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन कुमार और जिला अध्यक्ष वंदना ने कहा कि मनरेगा लेखपालों की नियुक्ति मनरेगा से संबंधित कार्य करने के लिए हुई थी। वतर्मान में अन्य लेखापालों के समान सभी कार्य इनसे लिए जा रहे हैं, जबकि विकास खंड कार्यालयों में नियमित लेखपाल या प्रगति सहायकों की छुट्टी होने पर सारा काम मनरेगा लेखापाल संभालते हैं। बावजूद वे विभाग के कर्मचारी नहीं हैं। विभाग और सरकार का सारा काम करने के बाद भी उनकी आर्थिक सुरक्षा अनिश्चित है और इनके साथ भेदभाव हो रहा है।
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मनरेगा लेखापालों की नियुक्ति साल 2010 में हुई थी। लेकिन, अभी तक भी विभाग में मर्ज होने के लिए कोई नीति नहीं है। इससे उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है, जबकि तीन साल का अनुबंध पूरा करने वाले कर्मचारियों को नियमित कर दिया जाता है। उसी तर्ज पर मनरेगा लेखापाल भी नियमित होने का अधिकार रखते हैं। लेकिन, आठ सालों के बाद भी उन्हें नियमित नहीं किया गया है। संघ ने मनरेगा के कनिष्ठ लेखापालों को नियमित कर ग्रामीण विकास विभाग में मर्ज किया जाए।
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