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बार-बार के नोटिस भेज तंग न करे स्थास्थ्य विभाग
Updated Fri, 06 Jul 2018 11:24 PM IST
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बार-बार के नोटिस भेज तंग न करे स्वास्थ्य विभाग
मेडिकल लैब प्रोफेशनल्स एसोसिएशन की दो टूक
सरकार को दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। मेडिकल लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश ने निजी लैबोरेटरी संचालकों को क्लिनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के नाम पर बार-बार नोटिस भेजने पर आपत्ति जताई है। यह आपत्ति एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार ने जताई है। उन्होंने कहा कि नोटिस से स्वास्थ्य विभाग निजी लैब संचालकों को अपनी-अपनी लैबों को एक एमबीबीएस डॉक्टर को नियुक्त कर पंजीकृत करवाने के लिए बाध्य कर रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एमबीबीएस डॉक्टर का काम मरीजों का इलाज करना है न कि उनके खून, थूक और पेशाब आदि की जांच करना। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट करने का काम लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स (लैबोरेटरी टेकनीशियन/ टेक्नोलोजिस्ट ) का है और सभी लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स (लैबोरेटरी टेकनीशियन/ टेक्नोलोजिस्ट) स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों के अनुसार इस क्षेत्र से संबंधित जरुरी पढ़ाई लिखाई और प्रशिक्षण प्राप्त करके हिमाचल प्रदेश पैरा मेडिकल आउंसिल शिमला में पंजीकृत हैं। ऐसी स्थिति में निजी लैबोरेटरी संचालकों को परेशान करना गलत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में पहले से ही एमबीबीएस डॉक्टरों की भारी कमी है, ऐसे में वे एमबीबीएस डॉक्टर कहां से लाएं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि निजी लैब संचालकों को वेबजह परेशान करना बंद किया जाए। अन्यथा प्रदेश भर से निजी लैबोरेटरी संचालक अपनी-अपनी लैबें बंद करके सड़कों पर उतर आएंगे।
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मेडिकल लैब प्रोफेशनल्स एसोसिएशन की दो टूक
सरकार को दी सड़कों पर उतरने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
धर्मशाला। मेडिकल लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स एसोसिएशन हिमाचल प्रदेश ने निजी लैबोरेटरी संचालकों को क्लिनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के नाम पर बार-बार नोटिस भेजने पर आपत्ति जताई है। यह आपत्ति एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सतीश कुमार ने जताई है। उन्होंने कहा कि नोटिस से स्वास्थ्य विभाग निजी लैब संचालकों को अपनी-अपनी लैबों को एक एमबीबीएस डॉक्टर को नियुक्त कर पंजीकृत करवाने के लिए बाध्य कर रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि एमबीबीएस डॉक्टर का काम मरीजों का इलाज करना है न कि उनके खून, थूक और पेशाब आदि की जांच करना। उन्होंने कहा कि यह टेस्ट करने का काम लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स (लैबोरेटरी टेकनीशियन/ टेक्नोलोजिस्ट ) का है और सभी लैबोरेटरी प्रोफेशनल्स (लैबोरेटरी टेकनीशियन/ टेक्नोलोजिस्ट) स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों के अनुसार इस क्षेत्र से संबंधित जरुरी पढ़ाई लिखाई और प्रशिक्षण प्राप्त करके हिमाचल प्रदेश पैरा मेडिकल आउंसिल शिमला में पंजीकृत हैं। ऐसी स्थिति में निजी लैबोरेटरी संचालकों को परेशान करना गलत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार हिमाचल प्रदेश में सरकारी अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में पहले से ही एमबीबीएस डॉक्टरों की भारी कमी है, ऐसे में वे एमबीबीएस डॉक्टर कहां से लाएं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि निजी लैब संचालकों को वेबजह परेशान करना बंद किया जाए। अन्यथा प्रदेश भर से निजी लैबोरेटरी संचालक अपनी-अपनी लैबें बंद करके सड़कों पर उतर आएंगे।