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रेलवे बोर्ड ने अवरोधक लगाकर बढ़ाई ग्रामीणों की समस्या
Updated Sat, 24 Feb 2018 11:57 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
राजा का तालाब (कांगडा)। रेलवे बोर्ड ने डक से गुजरने वाली रेललाइन के आरपार बनी सड़क के बीच में अवरोधक लगाकर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। राजा का तालाब से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक मां कोटे वाली के चरणों में बसे गांव गुरियाल, दाहब, सोहर, डक, डमोह और मिंजग्रां के लगभग बारह हजार की आबादी को रेलवे बोर्ड के इस कार्य से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
साल 2007-08 में फाटक खुलवाने के लिए उक्त गांवों के लोगों ने रेल रोको आंदोलन भी किया था, ताकि इन गांवों के लोगों को बस सुविधा से जोड़ा जा सके, लेकिन रेल रोको आंदोलन में नेताओं के आश्वासन के बाद भी फाटक नहीं खुल पाया। फाटक खुलवाने को आंदोलन में हिस्सा लेने वाले 40 से 50 लोगों पर रेलवे विभाग ने केस बनाकर उनके घावों पर नमक छिड़क दिया। स्थानीय लोगों राजेश ठाकुर, प्रेम सिंह, देव राज, गौतम शर्मा, तेज लाल, अशोक कुमार, राजीव सिंह, राजकुमार, छज्जू राम, अजय शर्मा, रणजीत सिंह, रूप लाल, विशाल सिंह, उधम सिंह, जीत राज, पुरुषोत्तम सिंह, सुरिंद्र कुमार, मलकीत सिंह, कुलबंत सिंह, संजीव शर्मा, शारदा देवी, अंजू वाला, सविता देवी, कमला देवी, मंजू वाला, मोनिका, सरिता देवी और रमा देवी का कहना है कि फाटक लगने से मां कोटे वाली के ऐतिहासिक मंदिर और गांवों से दिनचर्या के लिए जाने वाले गांव के लोगों से कुठारघात हुआ है। छोटे वाहनों के लिए सड़क को आर-पार से जोड़ने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद उनकी दिनचर्या सुचारु रूप से जारी थी। वहीं, आपात स्थिति में मरीजों को भी यहां से अस्पताल ले जाने में आसानी होती थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने अवरोधक लगाकर स्थानीय लोगों के लिए समस्या पैदा कर दी है।
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राजा का तालाब (कांगडा)। रेलवे बोर्ड ने डक से गुजरने वाली रेललाइन के आरपार बनी सड़क के बीच में अवरोधक लगाकर स्थानीय लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। राजा का तालाब से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक मां कोटे वाली के चरणों में बसे गांव गुरियाल, दाहब, सोहर, डक, डमोह और मिंजग्रां के लगभग बारह हजार की आबादी को रेलवे बोर्ड के इस कार्य से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
साल 2007-08 में फाटक खुलवाने के लिए उक्त गांवों के लोगों ने रेल रोको आंदोलन भी किया था, ताकि इन गांवों के लोगों को बस सुविधा से जोड़ा जा सके, लेकिन रेल रोको आंदोलन में नेताओं के आश्वासन के बाद भी फाटक नहीं खुल पाया। फाटक खुलवाने को आंदोलन में हिस्सा लेने वाले 40 से 50 लोगों पर रेलवे विभाग ने केस बनाकर उनके घावों पर नमक छिड़क दिया। स्थानीय लोगों राजेश ठाकुर, प्रेम सिंह, देव राज, गौतम शर्मा, तेज लाल, अशोक कुमार, राजीव सिंह, राजकुमार, छज्जू राम, अजय शर्मा, रणजीत सिंह, रूप लाल, विशाल सिंह, उधम सिंह, जीत राज, पुरुषोत्तम सिंह, सुरिंद्र कुमार, मलकीत सिंह, कुलबंत सिंह, संजीव शर्मा, शारदा देवी, अंजू वाला, सविता देवी, कमला देवी, मंजू वाला, मोनिका, सरिता देवी और रमा देवी का कहना है कि फाटक लगने से मां कोटे वाली के ऐतिहासिक मंदिर और गांवों से दिनचर्या के लिए जाने वाले गांव के लोगों से कुठारघात हुआ है। छोटे वाहनों के लिए सड़क को आर-पार से जोड़ने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद उनकी दिनचर्या सुचारु रूप से जारी थी। वहीं, आपात स्थिति में मरीजों को भी यहां से अस्पताल ले जाने में आसानी होती थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने अवरोधक लगाकर स्थानीय लोगों के लिए समस्या पैदा कर दी है।
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