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किसानों की मेहनत पर भारी मौसम की बेमिजाजी
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:45 PM IST
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सूखे की मार से खेतों में पीली पड़ने लगी गेहूं
बिना बारिश किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। सालभर खेतों में कड़ी मेहनत करने वाले किसानों की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं। मौसम के करवट बदलते ही तापमान में उतार-चढ़ाव से गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडराने लग पड़े हैं। हालात यह है कि तापमान में बढ़ोतरी के साथ बारिश न होने से जमीन की नमी में कमी आने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। जबकि इस समय गेहूं में फ्लावरिंग और ग्रेन फार्मेशन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में तापमान में बढ़ोतरी का गेहूं के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कृषि जानकारों की मानें तो जमीन में नमी की कमी से न सिर्फ फ्लावरिंग की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, बल्कि बारिश में देरी होने से ग्रेन फार्मेशन भी प्रभावित होगी। ऐसे हालात में तापमान में बढ़ोतरी गेहूं उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलकने लगी हैं। इससे पहले भी बुआई के समय पर बारिश न होने के चलते गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी और अब बारिश में देरी और लगातार तापमान में वृद्धि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल मुरझाने लगी है। देखा जाए तो इस रबी सीजन में गेहूं की फसल पर कम बारिश की मार भारी रही है और पिछले दो-तीन महीनों में एक आध अच्छी बारिश को छोड़ कर एक-दो हल्की बारिशें हुई हैं। हालांकि, बुधवार को आसमान में उमड़े बादलों से किसानों को बारिश होने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन शाम तक बादल छंटने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। पिछले दिनों भी तीन दिन आसमान में बादलों की लुक्का-छिपी के बीच हल्की बूंदाबांदी के बाद आसमान से बादल छंट गए थे। लेकिन अब मौसम के गर्म होने के साथ गेहूं की फसल में दाने बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस समय गेहूं की फसल के लिए बारिश बेहद जरूरी है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो नूरपुर क्षेत्र में करीब 9846 हेक्टेयर भूमि में गेहूं, 4640 हेक्टेयर भूमि में मक्की, 5872 हेक्टेयर में धान तथा करीब 462 हेक्टेयर भूमि में सब्जियों की पैदावार होती है लेकिन ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं। नूरपुर क्षेत्र के किसान विक्रम जंबाल, सुभाष सिंह, ओंकार सिंह, केवल सिंह, करनैल सिंह, रमेश चंद, बलदेव, मुकेश शर्मा व हरि सिंह इत्यादि का कहना है कि साल-दर-साल मौसम की बेरुखी के चलते किसानों और बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खेतों में गेहूं की फसल नमी कम होने से सूखने की कगार पर पहुंच गई है और बारिश में देरी का सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ेगा।
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बिना बारिश किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
नूरपुर (कांगड़ा)। सालभर खेतों में कड़ी मेहनत करने वाले किसानों की मुसीबतें कम होती नहीं दिख रही हैं। मौसम के करवट बदलते ही तापमान में उतार-चढ़ाव से गेहूं की फसल पर संकट के बादल मंडराने लग पड़े हैं। हालात यह है कि तापमान में बढ़ोतरी के साथ बारिश न होने से जमीन की नमी में कमी आने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। जबकि इस समय गेहूं में फ्लावरिंग और ग्रेन फार्मेशन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में तापमान में बढ़ोतरी का गेहूं के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कृषि जानकारों की मानें तो जमीन में नमी की कमी से न सिर्फ फ्लावरिंग की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा, बल्कि बारिश में देरी होने से ग्रेन फार्मेशन भी प्रभावित होगी। ऐसे हालात में तापमान में बढ़ोतरी गेहूं उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें झलकने लगी हैं। इससे पहले भी बुआई के समय पर बारिश न होने के चलते गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी और अब बारिश में देरी और लगातार तापमान में वृद्धि से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल मुरझाने लगी है। देखा जाए तो इस रबी सीजन में गेहूं की फसल पर कम बारिश की मार भारी रही है और पिछले दो-तीन महीनों में एक आध अच्छी बारिश को छोड़ कर एक-दो हल्की बारिशें हुई हैं। हालांकि, बुधवार को आसमान में उमड़े बादलों से किसानों को बारिश होने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन शाम तक बादल छंटने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। पिछले दिनों भी तीन दिन आसमान में बादलों की लुक्का-छिपी के बीच हल्की बूंदाबांदी के बाद आसमान से बादल छंट गए थे। लेकिन अब मौसम के गर्म होने के साथ गेहूं की फसल में दाने बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस समय गेहूं की फसल के लिए बारिश बेहद जरूरी है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो नूरपुर क्षेत्र में करीब 9846 हेक्टेयर भूमि में गेहूं, 4640 हेक्टेयर भूमि में मक्की, 5872 हेक्टेयर में धान तथा करीब 462 हेक्टेयर भूमि में सब्जियों की पैदावार होती है लेकिन ज्यादातर किसान सिंचाई के लिए बारिश के पानी पर ही निर्भर हैं। नूरपुर क्षेत्र के किसान विक्रम जंबाल, सुभाष सिंह, ओंकार सिंह, केवल सिंह, करनैल सिंह, रमेश चंद, बलदेव, मुकेश शर्मा व हरि सिंह इत्यादि का कहना है कि साल-दर-साल मौसम की बेरुखी के चलते किसानों और बागवानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि खेतों में गेहूं की फसल नमी कम होने से सूखने की कगार पर पहुंच गई है और बारिश में देरी का सीधा असर फसल के उत्पादन पर पड़ेगा।