हिमाचल में जॉब स्कैम: नौ माह में बेरोजगारों से दो करोड़ ठगे, पुलिस के पास पहुंचीं 378 शिकायतें
ठगों के निशाने पर ऑनलाइन नौकरी तलाश रहे युवा हैं। साइबर ठग सोशल साइटों पर लुभावने विज्ञापन और प्रलोभन देकर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। युवाओं को डाटा एंट्री, पैराग्राफ राइटिंग, पार्ट-टाइम और सोशल मीडिया टास्क का झांसा दिया जाता है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवाओं से भारी साइबर ठगी हो रही है। नौ महीनों में जॉब स्कैम की 378 शिकायतें साइबर क्राइम सेल पहुंची हैं। इन मामलों में शातिर ठगों ने युवाओं से दो करोड़ रुपये की रकम ऐंठी है। ठगों के निशाने पर ऑनलाइन नौकरी तलाश रहे युवा हैं। साइबर ठग सोशल साइटों पर लुभावने विज्ञापन और प्रलोभन देकर धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। युवाओं को डाटा एंट्री, पैराग्राफ राइटिंग, पार्ट-टाइम और सोशल मीडिया टास्क का झांसा दिया जाता है। इसके अलावा विदेशी नौकरियों, लॉजिस्टिक्स मैनेजर की नौकरी देने के नाम पर भी फंसाया जा रहा है। चिंता की बात यह है कि 378 शिकायतें केवल वे हैं, जिनकी जानकारी साइबर हेल्पलाइन नंबर पर दी गई है।
हजारों युवाओं को ठगी का शिकार बनाया जा रहा
वास्तविकता में प्रदेश के हजारों युवाओं को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। ठग बेहतरीन नौकरी का झांसा देकर युवाओं का विश्वास जीतते हैं। इसके बाद पंजीकरण फीस, सत्यापन, ट्रेनिंग मेटेरियल, सॉफ्टवेयर, यूनिफॉर्म या वीजा फीस के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। शुरुआत में पंजीकरण फीस महज 500 रुपये हो सकती है, लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे डिमांड बढ़ाई जाती है। बेरोजगारी से परेशान युवा झांसे में आकर पैसे दे देते हैं। इसके बाद मोबाइल नंबर और पेज बंद कर दिए जाते हैं।
सूझबूझ से टली 17 हजार रुपये की ठगी
प्रदेश के एक युवक ने इंस्टाग्राम पर पैराग्राफ राइटिंग के काम के एवज में आकर्षक पैसे देने का विज्ञापन देखा। युवक ने फौरन इंस्टाग्राम डीएम के जरिये संपर्क कर नौकरी के लिए आवेदन कर दिया। उसे एक व्हाट्सएप नंबर दिया गया और पंजीकरण के लिए 500 रुपये मांगे गए। रुपये जमा करवाने के बाद सत्यापन के लिए पैन कार्ड विवरण और जीएसटी दस्तावेज मांगे गए। दस्तावेज देने के बाद ठगों ने 17,000 रुपये के अतिरिक्त भुगतान की मांग की। मंशा पर शक होने पर युवक ने समझदारी दिखाई और बड़ी ठगी होने से पहले ही हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत कर दी।
ठगी से ऐसे बचें
नौकरी, रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, यूनिफॉर्म, लैपटॉप या सॉफ्टवेयर के नाम पर पहले पैसे मांगने वाली कंपनी फर्जी है।
गूगल पर कंपनी का असली नाम सर्च करें और आधिकारिक वेबसाइट व करियर पेज पर वैकेंसी जांचें।
गूगल पर कंपनी का नाम, स्कैम या रिव्यू लिखकर सर्च करें ताकि पुरानी शिकायतों का पता चल सके।
कंपनियां हमेशा आधिकारिक डोमेन से ईमेल करती हैं।
बिना अनुभव बहुत कम काम के बदले मोटी सैलरी (जैसे घर बैठे रोजाना हजारों रुपये) का वादा हमेशा ट्रैप है।
ऑफर लेटर मिलने और कंपनी की पुष्टि से पहले अपना आधार, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट नंबर साझा न करें।
हमेशा सुरक्षित जॉब साइट्स जैसे लिंक्डइन, नौकरी, इंडिड, इंटर्नशाला या सीधे कंपनी के करियर पेज से आवेदन करें।
कोई भी असली या प्रतिष्ठित कंपनी नौकरी देने के बदले कभी पैसे की मांग नहीं करती है। युवाओं को पैसे की मांग होते ही समझ जाना चाहिए कि उनके साथ ठगी की कोशिश हो रही है। अगर ठगी हो गई है तो घबराएं नहीं, जल्द से जल्द साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर इसकी शिकायत करें- अमित यादव, एसपी साइबर क्राइम, हिमाचल