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Himachal News: घोड़े की पूंछ के बाल से बनी गरारंग से कृष्ण लाल बजाते हैं वीणा, संघर्ष की कहानी है प्रेरणादायक

Sun, 27 Oct 2024 11:36 AM IST
अंकेश डोगरा भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 27 Oct 2024 11:36 AM IST
सार

किन्नौर के वीणा वादक कृष्ण लाल की एक अलग अपनी एक पहचान है। इनकी वीणा का हर कोई दीवाना है। वहीं, ये वीणा भी कुछ खास है। ये बाजार में नहीं मिलती बल्कि खास तरीके से बनाई जाती है। कैसे? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

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inspiring story krishna lal plays veena with garrang made from horse tail hair
शिमला के रिज मैदान पर कार्यक्रम में प्रस्तुति देते कलाकार कृष्ण लाल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

घोड़े की पूंछ के बाल से बनी गरारंग से किन्नौरी वीणा बजाकर किन्नौर के दिव्यांग कलाकार कृष्ण लाल ने लोगों में अपनी अलग पहचान बना ली है। वह देश में कई जगह अपनी बनाई गई वीणा को बजाने की प्रस्तुति दे चुके हैं।

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राजधानी के ओपन गेयटी थियेटर में शनिवार को आयोजित लोक विरासत कार्यक्रम में प्रस्तुति देने  पहुंचे वीणा वादक कृष्ण लाल आकर्षण का केंद्र बने रहे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी वीणा बनाने की परंपरा चलती आ रही है। वह स्वयं इस वीणा को बजाते हैं। यह बाजार में उपलब्ध  नहीं होती। इसे किन्नौर की कैल लकड़ी से बनाया जाता है। इसके ऊपरी हिस्से को घोड़े के मुख का आकार दिया जाता है। क्योंकि पुराने बुजुर्ग इस चिह्न को शुभ मानते थे। इसके बाद इसमें ध्वनि के लिए टेलिफोन के तार लगाए जाते हैं। इसे बजाने के लिए गरारंग तैयार किया जाता है, जिसमें घोड़े की पूंछ के बाल लगाए जाते हैं। 
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गरारंग को टेलिफोन के तारों पर चलाने से वीणा में ध्वनि निकलती है। गरारंग को पहले देवदार की लकड़ी पर घिसा जाता है, जिसके बाद इससे ज्यादा मधुर ध्वनि निकलती है। उन्होंने बताया कि यदि वीणा में लगाई गई टेलिफोन के तारों पर पानी या तेल लग जाता है तो यह ध्वनि निकालना बंद कर देती हैं। इसके बाद इसे कोयले से साफ किया जाता है।

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ट्यूमर के कारण टांग काटनी पड़ी, पर हार नहीं मानी
वीणा वादक कृष्ण लाल ने बताया कि 2003 में ट्यूमर होने के कारण उनकी एक टांग काटनी पड़ी थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उसके बाद भी लोक कला को बचाने के लिए काम जारी रखा। 67 वर्षीय कृष्ण लाल शिल्पी कलाकार भी हैं, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि वीणा बजाना और बनाना उन्होंने अपने पिता से सीखा है। अब आगे अपने 15 वर्षीय पौत्र को भी सिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हर तरह की लोककलाएं विलुप्त होती जा रही हैं। इसका मुख्य कारण मोबाइल फोन और इंटरनेट है। अब लोग अपने मनोरंजन के लिए इन्हीं चीजों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। पहले लोग अपने घर के हर कार्यक्रम में वीणा वादक को बुलाते थे। लोग बहुत रुचि के साथ सुनते थे। लेकिन अब समय में बदलाव हो चुका है।

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