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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   HP News Government will go to Supreme Court to save the jobs of teachers without TET pass

HP News: बिना टेट पास शिक्षकों की नौकरी बचाने सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार, याचिका दायर करने की तैयारी; जानें

Sat, 01 Nov 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 01 Nov 2025 02:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश सरकार शीर्ष अदालत से एक सितंबर के फैसले में शिक्षकों को राहत देने का आग्रह करेगी। राज्य सरकार का तर्क है कि हिमाचल में कई शिक्षक 2011 में टेट लागू होने से पहले से ही नियुक्त हैं। ऐसे में उन्हें सेवा से बाहर करना न तो न्यायसंगत होगा और न ही व्यावहारिक। पढ़ें पूरी खबर...

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HP News Government will go to Supreme Court to save the jobs of teachers without TET pass
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल सरकार राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में बिना टेट पास सेवाएं दे रहे शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी। प्रदेश सरकार शीर्ष अदालत से एक सितंबर के फैसले में शिक्षकों को राहत देने का आग्रह करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर को फैसला दिया है कि पहली से 8वीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) पास होना अनिवार्य है।

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बिना टेट पास शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। शिक्षा विभाग ने इस संबंध में प्रारंभिक कानूनी परामर्श पूरा कर लिया है और शिक्षकों का रिकॉर्ड एकत्र होने के बाद जल्द ही याचिका दायर की जाएगी। राज्य सरकार का तर्क है कि हिमाचल में कई शिक्षक 2011 में टेट लागू होने से पहले से ही नियुक्त हैं। ऐसे में उन्हें सेवा से बाहर करना न तो न्यायसंगत होगा और न ही व्यावहारिक।

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उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे कई राज्य राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर चुके हैं। अब इन्हीं राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश भी शीर्ष अदालत जाने की तैयारी में है। राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार हिमाचल में सरकारी स्कूलों के अलावा कई निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में सैकड़ों शिक्षक ऐसे हैं जो टेट पास किए बिना नियुक्त हुए थे। इनमें से कई की नियुक्ति 2005 से 2011 के बीच हुई थी, तब टेट शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य नहीं था। सरकारी और निजी स्कूलों में कितने ऐसे शिक्षक हैं, इसका शिक्षा विभाग की ओर से रिकॉर्ड एकत्र किया जा रहा है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन शिक्षकों ने लंबे समय तक सेवाएं दी हैं और छात्रों के शैक्षणिक परिणामों में भी उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में सिर्फ योग्यता परीक्षा के आधार पर उन्हें बाहर करना अनुचित होगा।

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सरकार मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहती है। जिन शिक्षकों ने वर्षों सेवाएं दी हैं और जिनकी नियुक्तियां उस समय के नियमों के अनुसार हुई थीं, उन्हें एक झटके में बेरोजगार नहीं किया जा सकता। सरकार चाहती है कि कोर्ट राज्य को यह छूट दे कि वह पुराने शिक्षकों को सेवा में बनाए रख सके और उन्हें एक निश्चित समय में टेट पास करने का अवसर दे सके। - रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री।
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