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Himachal Pradesh: रिपोर्ट में खुलासा, बाढ़ के लिहाज से हिमाचल के 3 उच्च व 4 जिले मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल

Sun, 15 Dec 2024 05:52 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sun, 15 Dec 2024 05:52 PM IST
सार

बाढ़ के लिहाज से हिमाचल के तीन उच्च व चार जिले मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल हैं। जबकि सूखे के लिहाज से चार उच्च, छह मध्यम जोखिम श्रेणी में हैं। यह रिपोर्ट शुक्रवार का जारी की गई है। 

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HP IIT Report In terms of floods 3 districts are in high risk and 4 districts are in medium risk category
डिजाइन फोटो। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के लिए जिला-स्तरीय जलवायु जोखिम आकलन आईपीसीसी फ्रेमवर्क का उपयोग करके बाढ़ और सूखे के जोखिमों का मानचित्रण रिपोर्ट जारी की गई है। यह रिपोर्ट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी, आईआईटी मंडी और सेंटर फॉर स्टडी ऑफ साइंस, टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी (सीएसटीईपी), बेंगलुरु के सहयोग से बनाई गई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार का जारी की गई है। इस दौरान आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा भी मौजूद रहे।
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इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बाढ़ के लिहाज से हिमाचल के तीन उच्च व चार जिले मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल हैं। जबकि सूखे के लिहाज से चार उच्च, छह मध्यम जोखिम श्रेणी में हैं। बाढ़ के लिहाज से कांगड़ा, ऊना व बिलासपुर उच्च, मंडी, हमीरपुर, सोलन व सिरमौर मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल हैं। सूखे के लिहाज से ऊना, चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर उच्च जोखिम और सिरमौर, शिमला, मंडी, बिलासपुर, सोलन, कुल्लू मध्यम जोखिम श्रेणी में शामिल है।
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रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम के दौरान डीएसटी की वैज्ञानिक प्रभाग प्रमुख डॉ. अनीता गुप्ता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हमारे समय की सबसे विकट चुनौतियों में से एक है। यह कृषि, आजीविका और जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है। कोई भी एक इकाई अकेले इसका समाधान नहीं कर सकती है। इसके लिए सामूहिक प्रयासों और अभिनव रूपरेखाओं की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट के माध्यम से कमजोरियों की पहचान करने, संवेदनशीलता का आकलन करने और जोखिम में स्थानीय समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हैं। इन निष्कर्षों को जमीनी स्तर पर कार्रवाई में बदलना आवश्यक है और इन जानकारियों को राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर प्रत्येक हितधारक तक पहुंचना चाहिए।
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शोध के बारे में बात करते हुए आईआईटी मंडी की शोधकर्ता डॉ. श्यामाश्री दासगुप्ता ने कहा कि इस शोध परियोजना ने हमें बाढ़ और सूखे के जोखिम से संबंधित अखिल भारतीय जिला स्तरीय मानचित्र विकसित करने और जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों की पहचान करने में मदद की। राज्यों ने भी अपने-अपने राज्यों के लिए जोखिम आकलन तैयार किए हैं। यह परियोजना अत्यधिक डेटा गहन है और स्थान के बुनियादी संकेतकों पर समय पर डेटा उपलब्धता की आवश्यकता पर प्रकाश डालती है।

आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक प्रोफेसर देवेंद्र जलिहाल ने कहा कि भारत का कृषि समाज मानसून पर बहुत अधिक निर्भर है। जिससे जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियाँ, जैसे सूखा और अत्यधिक वर्षा और भी गंभीर हो जाती हैं। यह रिपोर्ट, डीएसटी, एसडीसी के बीच सहयोग से 600 से अधिक जिलों के लिए एक व्यापक जोखिम मूल्यांकन प्रदान करती है।

बाढ़ का खतरा
भारत में 51 जिलों में बाढ़ का खतरा बहुत अधिक है। जबकि 118 और जिलों को उच्च जोखिम की श्रेणी में रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।

सूखे का खतरा
91 जिलों को अत्यंत उच्च सूखे के जोखिम वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है। 188 जिलों को उच्च सूखे के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। जिनमें मुख्य रूप से बिहार, असम, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र शामिल हैं।

दोहरे जोखिम वाले क्षेत्र
चिंताजनक बात यह है कि पटना (बिहार), अलपुझा (केरल) और केन्द्रपाड़ा (ओडिशा) सहित 11 जिले बाढ़ और सूखे दोनों के लिए बहुत उच्च जोखिम में हैं, जिसके लिए तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
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