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Himachal: नर्सों की पदोन्नति पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश, सिस्टर ट्यूटर के रिक्त पद दो माह में भरें
Sat, 13 Dec 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 13 Dec 2025 02:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट स्टाफ नर्सों के हक में फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिस्टर ट्यूटर के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरें। जानें पूरा मामला...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टाफ नर्सों की पदोन्नति से संबंधित राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह सिस्टर ट्यूटर के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरें। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने यह प्रक्रिया दो महीने के भीतर पूरी करने और याचिकाकर्ताओं को यदि वे पात्र पाए जाते हैं, तो पदोन्नति देने का आदेश दिया है।
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याचिकाकर्ता जो आईजीएमसी, शिमला और नेरचौक मंडी में स्टाफ नर्स के रूप में कार्यरत हैं। उनका मुख्य आरोप यह था कि वे 21 जनवरी 2025 को सिस्टर ट्यूटर के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र हैं। बावजूद विभाग ने उनसे कनिष्ठ स्टाफ नर्सों को लाभ देने के उद्देश्य से उनकी पात्रता तिथि से ठीक पहले 20 जनवरी 2025 को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक की, जिससे कनिष्ठ कर्मचारी सिस्टर ट्यूटर के कैडर में उनसे वरिष्ठ हो गईं।
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अदालत ने पाया कि 20 जनवरी 2025 को हुई डीपीसी बैठक के समय याचिकाकर्ता पदोन्नति के लिए पात्र नहीं थे। हालांकि, विभाग की ओर से प्रस्तुत रिकॉर्ड से यह स्वीकार किया गया कि वर्तमान में सिस्टर ट्यूटर के 13 पद रिक्त हैं (जिसमें पिछली डीपीसी की समीक्षा के बाद खाली हुए पद और टांडा के 6 पद शामिल हैं)। कोर्ट ने इस बात पर संज्ञान लिया कि 12 से अधिक पद रिक्त हैं और याचिकाकर्ताओं ने अब भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार पात्रता हासिल कर ली है।
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कॉलेज कर्मियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के सेंट बीड्स कॉलेज के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष और सरकारी सहायता से जुड़े 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना और 7 नवंबर 2025 के संचार के क्रियान्वयन और संचालन पर अगली सुनवाई की तारीख तक रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं और दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 को होगी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे वर्तमान नियमों, अधिसूचनाओं, और पूर्व में पारित अदालती आदेश के अनुसार 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि पहले के आदेशों और जीआइए नियमों के प्रभाव के अनुसार कॉलेज कर्मचारियों को 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक ग्रांट-इन-एड मिलना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना पर आपत्ति जताई, जिसके तहत सहायता प्राप्त गैर-सरकारी कॉलेजों के कर्मचारियों के संबंध में जीआइए की स्वीकार्यता केवल 58 वर्ष की आयु तक ही सीमित कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नई अधिसूचना अदालत के पिछले फैसलों और मौजूदा नियमों के विपरीत है और यदि इसे लागू किया गया तो उनकी आय में अचानक और भारी कमी आएगी, जिससे उनका जीवन दयनीय हो जाएगा।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के सेंट बीड्स कॉलेज के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष और सरकारी सहायता से जुड़े 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना और 7 नवंबर 2025 के संचार के क्रियान्वयन और संचालन पर अगली सुनवाई की तारीख तक रोक लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं और दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 1 जनवरी 2026 को होगी। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि वे वर्तमान नियमों, अधिसूचनाओं, और पूर्व में पारित अदालती आदेश के अनुसार 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के हकदार हैं। उन्होंने कहा कि पहले के आदेशों और जीआइए नियमों के प्रभाव के अनुसार कॉलेज कर्मचारियों को 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक ग्रांट-इन-एड मिलना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने 3 नवंबर 2025 की अधिसूचना पर आपत्ति जताई, जिसके तहत सहायता प्राप्त गैर-सरकारी कॉलेजों के कर्मचारियों के संबंध में जीआइए की स्वीकार्यता केवल 58 वर्ष की आयु तक ही सीमित कर दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह नई अधिसूचना अदालत के पिछले फैसलों और मौजूदा नियमों के विपरीत है और यदि इसे लागू किया गया तो उनकी आय में अचानक और भारी कमी आएगी, जिससे उनका जीवन दयनीय हो जाएगा।