{"_id":"681a36bb88714a5eda0d7127","slug":"hp-high-court-directs-govt-should-implement-the-notification-of-early-childhood-care-and-education-rules-2019-2025-05-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Himachal: हाईकोर्ट के निर्देश- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नियम-2019 की अधिसूचना लागू करे सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Himachal: हाईकोर्ट के निर्देश- प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नियम-2019 की अधिसूचना लागू करे सरकार
Wed, 07 May 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 07 May 2025 05:00 AM IST
सार
हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार को आठ सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नियम, 2019 की अधिसूचना को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा नियम, 2019 की अधिसूचना को लागू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने सरकार को आठ सप्ताह के भीतर नियम लागू करने के निर्देश दिए। बता दें कि यह अधिसूचना 6 साल से नीचे और 3 साल आयु से ऊपर के बच्चाें की देखभाल के लिए जारी दिशा-निर्देशों से जुड़ी है।
विज्ञापन
अदालत में इस मामले को लेकर 10 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास के अतिरिक्त निदेशक मोहन दत्त ने अधिनियम, 2017 के अनुसार उक्त नियमों के प्रारूपण के बारे में सूचित किया था। उन्होंने बताया कि केंद्र ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के चलते राज्य को 2017 अधिनियम के नियमों को अंतिम रूप देने को स्थगित करने की सलाह दी थी। वहीं केंद्र के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बाल विकास प्रभाग की ओर से 1 मई के निर्देशों की एक प्रति प्रस्तुत की गई। इसमें स्पष्ट किया गया है कि केंद्र ने राज्य सरकार को 2017 के अधिनियम के तहत नियम बनाने से परहेज करने के लिए कोई विशेष सलाह जारी नहीं की है।
विज्ञापन
निर्देशों में बताया है कि जब 2013 के ईसीसीई दिशा-निर्देश लागू थे, तब से शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 पेश की थी और महिला और बाल विकास मंत्रालय ने दो पाठ्यक्रम रूपरेखाएं विकसित की थीं। केंद्र सरकार द्वारा प्रतिवादी राज्य को कोई सलाह जारी नहीं की गई थी, जो 2017 के अधिनियम द्वारा अनिवार्य नियमों के निर्माण को रोकती हो। अदालत में नियम, 2019 को शीघ्र अधिसूचित एवं प्रकाशित करने को लेकर एक याचिका दायर की गई थी।
याचिका में मांग की थी कि न्याय के हित में इन नियमों की तत्काल अधिसूचना जारी करना आवश्यक है। याचिका में बताया गया है कि इन नियमों में छोटे बच्चों की देखरेख, खानपान, भवन और बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक का अनुपात निर्धारित किए गए हैं। अभी तक प्री प्राइमरी स्कूल को चलाने के लिए विशेष नियम नहीं बनाए गए हैं। हर कोई कहीं भी अपने स्कूल चला रहे हैं।
याचिका में मांग की थी कि न्याय के हित में इन नियमों की तत्काल अधिसूचना जारी करना आवश्यक है। याचिका में बताया गया है कि इन नियमों में छोटे बच्चों की देखरेख, खानपान, भवन और बच्चों को पढ़ाने के लिए अध्यापक का अनुपात निर्धारित किए गए हैं। अभी तक प्री प्राइमरी स्कूल को चलाने के लिए विशेष नियम नहीं बनाए गए हैं। हर कोई कहीं भी अपने स्कूल चला रहे हैं।