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HP High Court: हिमाचल हाईकोर्ट के निर्देश- कृषक प्रमाणपत्र जारी करने के नियमों में खामियां, सरकार संशोधन करे
Sat, 29 Nov 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sat, 29 Nov 2025 05:00 AM IST
सार
कृषक प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में हिमाचल हाईकोर्ट ने 18 मार्च 2010 के मौजूदा निर्देशों में स्पष्ट खामियां पाई हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने पाया कि गैर कृषक इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कृषक प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में 18 मार्च 2010 के मौजूदा निर्देशों में स्पष्ट खामियां पाई हैं। खंडपीठ ने राज्य सरकार को वर्ष 2010 के इन निर्देशों में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि इन निर्देशों को संशोधित करने की आवश्यकता है, ताकि उन्हें अधिनियम के मूल उद्देश्य के अनुरूप बनाया जा सके। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जो लोग कृषक नहीं हैं या जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, वे इसका दुरुपयोग न कर सकें।
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मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने पाया कि गैर कृषक इनका दुरुपयोग कर रहे हैं। न्यायालय ने पाया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) की ओर से 2010 को जारी निर्देशों में कृषक की परिभाषा के बावजूद आवेदन पत्र (फॉर्म ए-I) में स्पष्ट रूप से यह घोषणा नहीं मांगी गई है कि व्यक्ति हिमाचल प्रदेश भू-धारण और भूमि सुधार अधिनियम 1972 अधिनियम की धारा 2 की उप-धारा (4) के तहत व्यक्तिगत रूप से खेती कर रहा है।
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फॉर्म ए-I में केवल यह घोषणा देनी होती है कि व्यक्ति कृषक परिवार से है और उसके पास भूमि है। न्यायालय ने कहा कि इस अस्पष्टता के कारण झूठी घोषणा देना आसान है।न्यायालय ने यह भी पाया कि पटवारी द्वारा किए जाने वाले सत्यापन में केवल यह देखा जाता है कि व्यक्ति भूमि का मालिक और कब्जेदार है और कृषक परिवार से संबंधित है। वास्तव में भूमि पर व्यक्तिगत खेती हो रही है या नहीं, इसकी जमीनी जांच नहीं की जाती है। अदालत ने 9 सितंबर और 30 अक्तूबर 2025 को प्राप्त ई-मेल में अवैध प्रमाणपत्र जारी होने की घटनाओं पर प्रकाश डाला है। अदालत ने मंडी की पैलेस कॉलोनी का उदाहरण दिया, जो लंबे समय से कृषि भूमि नहीं रही है। मामले की सुनवाई अब 24 फरवरी 2026 को होगी।
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