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Himachal Weather: ठंड बढ़ी, मैदानों में कोहरा, अभी बारिश-बर्फबारी के आसार नहीं; कई इलाकों में सूखे के हालात

Thu, 21 Nov 2024 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/जोगिंद्रनगर (मंडी)।
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद, शिमला/जोगिंद्रनगर (मंडी)। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 21 Nov 2024 02:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में बारिश-बर्फबारी न होने से कई इलाकों में सूखे के हालात हैं। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने से 22 से 24 नवंबर तक हिमाचल में बारिश और बर्फबारी के आसार नहीं हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Weather Cold increased fog in the plains no chance of rain or snowfall yet
शिमला में बुधवार को खिली धूप में घूमते लोग। बुधवार को मौसम साफ रहा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर पड़ने से 22 से 24 नवंबर तक हिमाचल में बारिश और बर्फबारी के आसार नहीं हैं। मैदानों में कोहरा पड़ने का सिलसिला जारी रहा। इससे यातायात प्रभावित हो रहा है। पहाड़ों में ठंड बढ़ने से ग्लेशियर जमने लगे हैं। बारिश-बर्फबारी न होने से कई इलाकों में सूखे के हालात हैं। नदी-नालों में जलस्तर घटने से जोगिंद्रनगर में हिमाचल की 66 मेगावाट पन विद्युत बस्सी परियोजना और पंजाब राज्य विद्युत बोर्ड की 110 मेगावाट की शानन विद्युत परियोजना में विद्युत उत्पादन गिर गया है।
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उधर, ताबो, कुकुमसेरी, समदो में न्यूनतम तापमान माइनस में पहुंचने से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक झील और झरने जम रहे हैं। सालाना 250 करोड़ की आमदनी जुटाने वाली शानन परियोजना में विद्युत उत्पादन 60 प्रतिशत की गिरावट आई है। यहां 15 मेगावाट की चार और 50 मेगावाट की एक मशीन से कुल 110 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता था, जो इन दिनों 0.55 मिलियन मेगावाट ही हो रहा है। पावर हाउस में स्थापित 50 मेगावाट की एक और 15 मेगावाट की दो मशीनरियों को पानी की किल्लत के चलते बंद करना पड़ा है। बस्सी में भी पहले 66 मेगावाट विद्युत उत्पादन होता था, जो इन दिनों 16 मेगावाट तक सिमट चुका है। बस्सी में सालाना 100 करोड़ की आमदनी होती थी, जो इन दिनों पानी की कमी के चलते लाखों में सिमट गई है। पानी की आपूर्ति कम हो जाने से 16.4 मेगावाट की तीन टरबाइनों को बंद करना पड़ा है।
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शानन परियोजना के एसई अजीत कुमार ने बताया कि बरोट स्थित परियोजना की रेजरवायर में पानी की गिरावट के चलते विद्युत उत्पादन में गिरावट आई है, लेकिन तय लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। वहीं, आरई बस्सी परियोजना के आरई मनोज सेन का कहना है कि ग्लेशियर जमने से बरोट स्थित रेजर वायर में पानी में गिरावट आई है। जिस कारण विद्युत उत्पादन कम हो रहा है। बुधवार को राजधानी शिमला सहित प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में धूप खिलने के बावजूद अधिकतम तापमान 27 डिग्री तक ही पहुंचा।

प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम पारा गिरने से शीतलहर बढ़ गई है। लाहाैल की सिस्सू झील पर बर्फ की परत जम गई है। 13,124 फीट की ऊंचाई पर स्थित नीलकंठ झील के साथ रोहतांग दर्रे के साथ सटी भृगु झील का पानी भी ठोस बर्फ में तबदील होना शुरू हो गया है। 13,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रताल झील के साथ मनाली-लेह सड़क से सटे सूरजताल, दीपकताल व अल्यास झील का पानी बीते कुछ दिनों से ही जमना शुरू हो चुका है। जनजातीय क्षेत्र पांगी के तहत सचे जोत की सड़क में फिसलन बढ़ गई है।

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार 23 नवंबर को लाहौल-स्पीति, चंबा, कांगड़ा और कुल्लू जिले के ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश-बर्फबारी की संभावना है। बिलासपुर और सुंदरनगर में 23 व 24 नवंबर को कोहरा पड़ने का येलो अलर्ट जारी हुआ है। बुधवार सुबह सुंदरनगर और मंडी में कोहरे से दृश्यता 500 मीटर तक रही।

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न्यूनतम तापमान डिग्री सेल्सियस में
ताबो - 8.8
कुकुमसेरी -3.6
समदो  -1.1
कल्पा 1.2
मनाली 2.4
रिकांगपिओ 3.7
सोलन 4.8
ऊना 5.0
कांगड़ा 6.5
हमीरपुर 6.7
मंडी 6.9
शिमला 7.6
नाहन 11.1
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