हिमाचल: सिरमाैर में बनेगा प्रदेश का एलिफेंट कॉरिडोर, नहीं पहुंचाएंगे खेतों को नुकसान
उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
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खेतों में खड़ी फसल और जंगलों के बीच बढ़ती हाथियों की आवाजाही नई चुनौती बनती जा रही है। उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क से निकलकर पांवटा साहिब से नाहन तक पहुंच रहे जंगली हाथियों को सुरक्षित प्राकृतिक रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश का पहला एलिफेंट कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाथियों की लगातार बढ़ रही गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य स्तर पर इसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के समक्ष रखा जाएगा। सिरमौर में हाथियों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से यमुना नदी का जलस्तर कम होने के दौरान उत्तराखंड की तरफ से हाथी सिरमौर की सीमा में प्रवेश करते रहे हैं। पहले हाथियों की आवाजाही मुख्य रूप से बातामंडी, बहराल और सतीवाला तक सीमित रहती थी, जहां वे गन्ने और धान की फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद लौट जाते थे। अब हाथियों की आवाजाही पांवटा साहिब से लेकर नाहन सीमा तक देखी जा रही है।
डिजिटल मैपिंग से तलाशे जा रहे हाथियों के रास्ते
हाथियों की बदलती गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। उनके आने-जाने के पारंपरिक रास्तों, ठहरने वाले स्थानों और पसंदीदा क्षेत्रों का डाटा जीपीएस और आधुनिक मैपिंग टूल्स की मदद से जुटाया जा रहा है। इस डाटा को डिजिटल रूप में तैयार कर हाथियों के वास्तविक मूवमेंट रूट को चिह्नित किया जाएगा। इसी आधार पर प्रस्तावित कॉरिडोर की भौगोलिक सीमाएं तय होंगी।
2024 में मिला प्रोजेक्ट एलिफेंट का दर्जा
हाथियों के संरक्षण की दिशा में हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2024 में प्रोजेक्ट एलिफेंट में नामित किया जा चुका है। इसके बाद मानव और हाथी संघर्ष को कम करने और हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार राजाजी नेशनल पार्क से सटे सिरमौर के जंगलों में पानी की उपलब्धता, घना वन क्षेत्र और अनुकूल वातावरण हाथियों को आकर्षित कर रहा है। पांवटा साहिब के वन मंडलाधिकारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि एलिफेंट कॉरिडोर को मंजूरी मिलने के बाद हाथियों के संरक्षण के लिए केंद्र से विशेष आर्थिक सहायता मिलने की संभावना है।
हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत
वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। कोलर के समीप रात के समय हाथी के हमले में एक बुजुर्ग महिला की जान चली गई थी। वहीं, वर्ष 2024 में पानीवाला खाला-सैनवाला के समीप जंगली हाथी ने शिलाई क्षेत्र के एक भेड़पालक पर हमला किया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी।
फसल बचाने को किसानों ने छोड़ी गन्ने की खेती
हाथियों की बढ़ती दस्तक का सीधा असर किसानों की खेती पर भी पड़ा है। इस वर्ष बहराल, सतीवाला, बातामंडी और माजरा-सतीवाला में हाथियों द्वारा आम के बगीचों और धान की फसल को नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। बातामंडी, बहराल और पातलियां क्षेत्र में पिछले करीब एक दशक से हाथियों के डर के कारण कई किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी है या इसका रकबा काफी कम कर दिया है।