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Himachal Pradesh: कौन है वह जादूगर, जो पहाड़ की राजनीति में 'ब्राह्मणों' के जरिए कर रहा 2024 साधने की तैयारी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 12 Dec 2022 11:12 PM IST
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सार
Himachal Pradesh: 2011 की जनगणना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की आबादी 70 लाख से ज्यादा है। इसमें करीब 32 फीसदी राजपूत हैं और 18 फीसदी ब्राह्मण हैं। दोनों को मिलाएं तो प्रदेश में स्वर्ण आबादी के वोट पचास फीसदी से अधिक हो जाते हैं। इसके बाद 25.22 फीसदी संख्या अनुसूचित जाति की है...
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Himachal Pradesh: congress prepared to achieve 2024 lok sabha election through Brahmins politics
राहुल गांधी के साथ हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्सी सीएम मुकेश अग्निहोत्री - फोटो : PTI

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय के मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाया गया है। इससे पहले हिमाचल में शांता कुमार, जो ब्राह्मण समुदाय से आते थे, उन्होंने दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला था। कद्दावर नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम, भी इसी समुदाय से आते थे। हालांकि नेता प्रतिपक्ष रहे मुकेश अग्निहोत्री, सीएम पद की दौड़ में थे, लेकिन उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया है। हिमाचल की राजनीति को समझने वाले लोगों का कहना है, कांग्रेस पार्टी ने अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाकर '2024' के लोकसभा चुनाव को साधने की रणनीति बनाई है। प्रदेश में लोकसभा की चार सीटें हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को लगभग 43 फीसदी ब्राह्मणों के वोट मिले हैं, जबकि 36 फीसदी मत कांग्रेस के खाते में गए हैं। ब्राह्मणों को साधने की रणनीति के पीछे हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजीव शुक्ला की अहम भूमिका रही है।

राजीव शुक्ला की अहम भूमिका

जानकारों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष खीमी राम शर्मा को कांग्रेस में लाने वाले राजीव शुक्ला ही थे। ये अलग बात है कि विधानसभा चुनाव में एक कड़े मुकाबले में शर्मा हार गए हैं। खीमी राम शर्मा को पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल का करीबी माना जाता था। 2017 में जब भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल चुनाव हार गए, तो शर्मा को भी उसका राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा। पार्टी में शर्मा की अनदेखी होने लगी। राजीव शुक्ला ने शर्मा की काबिलियत को समझा और उन्हें कांग्रेस में ले आए। एग्जिट पोल में सामने आया था कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को राजपूत समुदाय के करीब 47 फीसदी वोट मिले थे। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 37 फीसदी रहा था। राजपूत समुदाय के सुखविंद्र सिंह सुक्खू को मुख्यमंत्री बनाया गया है। कांग्रेस ने इस तरह से दोनों बड़े समुदायों को बैलेंस कर दिया है।

2011 की जनगणना के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की आबादी 70 लाख से ज्यादा है। इसमें करीब 32 फीसदी राजपूत हैं और 18 फीसदी ब्राह्मण हैं। दोनों को मिलाएं तो प्रदेश में स्वर्ण आबादी के वोट पचास फीसदी से अधिक हो जाते हैं। इसके बाद 25.22 फीसदी संख्या अनुसूचित जाति की है। अनुसूचित जनजाति की संख्या 5.71 फीसदी है। 13.52 फीसदी ओबीसी हैं। अभी तक प्रदेश में शांता कुमार को छोड़कर बाकी सभी मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार, रामलाल ठाकुर, वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर, राजपूत समुदाय से रहे हैं। खास बात है कि गैर राजपूत मुख्यमंत्री शांता कुमार, दोनों बार राजनीतिक कारणों से अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 68 सदस्यीय विधानसभा में 17 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और तीन सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 2017 के चुनाव में 33 राजपूत विधायक चुनाव जीते थे।

तीन दशक से ठाकुर ही मुख्यमंत्री

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटर, तकरीबन दोनों पार्टियों के बीच विभाजित रहते हैं। राजपूत समुदाय और ओबीसी वर्ग का भी कुछ ऐसा ही समीकरण है। एससी समुदाय ने इस बार 30 फीसदी वोट भाजपा को दिया है। कांग्रेस के खाते में लगभग 51 फीसदी वोट गया है। जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी के प्रभारी राजीव शुक्ला ने अपनी इसी रणनीति के जरिए 2024 को साधने की तैयारी की है। उन्होंने ठाकुर और ब्राह्मणों के अलावा अन्य समुदायों को मजबूती के साथ कांग्रेस से जोड़ने का प्रयास किया है। करीब तीन दशक से भाजपा और कांग्रेस सरकारों में ठाकुर ही मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। पहली दफा ब्राह्मण समुदाय से आने वाले मुकेश अग्निहोत्री को डिप्टी सीएम बनाया गया है। कांग्रेस की रणनीति है कि अगर ब्राह्मण समुदाय, कांग्रेस के साथ बना रहता है, तो लोकसभा में पार्टी की राह आसान बन सकती है।

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