{"_id":"6911d6a587cc3985d00a1fed","slug":"himachal-mandi-disaster-tears-ganpatu-of-gamohu-and-savita-of-manjehra-became-emotional-2025-11-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Himachal News: आंखों में तैरे आपदा के जख्म, निकल आए आंसू; गमोहू की गणपतू और मंजेहड़ा की सविता हुईं भावुक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Himachal News: आंखों में तैरे आपदा के जख्म, निकल आए आंसू; गमोहू की गणपतू और मंजेहड़ा की सविता हुईं भावुक
Tue, 11 Nov 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Tue, 11 Nov 2025 05:00 AM IST
सार
मुख्यमंत्री के हाथों आपदा राहत की पहली किस्त लेने मंडी के पड्डल मैदान पहुंची सुंदरनगर के गमोहू की बुजुर्ग महिला गणपतू की आंखें पड्डल मैदान में पहुंचते ही नम हो गईं। सुंदरनगर के मंजेहड़ा गांव की आपदा प्रभावित सविता देवी की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
सुंदरनगर के गमोहू की बुजुर्ग महिला गणपतू/सुंदरनगर के मंजेहड़ा गांव की आपदा प्रभावित सविता देवी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मुख्यमंत्री के हाथों आपदा राहत की पहली किस्त लेने मंडी के पड्डल मैदान पहुंचे प्रभावितों के आंसू छलक आए। आपदा के कहर में अपनों को खो चुके लोगों की याद जहां रह-रहकर आई, वहीं ध्वस्त आशियानों का मंजर प्रभावितों की आंखों के सामने घूमता रहा। सगे संबंधियों ने ढांढस बंधाकर उनको हिम्मत दी। प्रभावितों ने बताया कि सरकार से मिलने वाली राहत से अब दोबारा वह अपने घर बना पाएंगे।
विज्ञापन
सुंदरनगर के गमोहू की बुजुर्ग महिला गणपतू की आंखें पड्डल मैदान में पहुंचते ही नम हो गईं। 75 वर्षीय गणपतू ने बताया कि उस शाम अन्य दिनों की तरह वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ घर में मौजूद थीं। करीब छह और सात बजे के बीच अचानक उनका घर और जमीन धंसना शुरू हो गई। किसी तरह परिवार के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बेटा प्रभ राम पेंट का कार्य करता है। अब उनके पास अपना घर तक नहीं है। प्रभ राम ने बताया कि वह अपनी मां, पत्नी व बच्चों के साथ अपने चाचा के घर में रहने को मजबूर है। सरकार से जो मदद अब प्राप्त होगी, उससे वह दोबारा घर बनाएंगे।
विज्ञापन
सुंदरनगर के मंजेहड़ा गांव की आपदा प्रभावित सविता देवी की आंखों से भी आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सविता ने बताया कि इस साल फरवरी में उन्होंने छह कमरों का मकान बनाया था। परिवार के साथ खुशी से नए मकान में रह रही थी। शायद भगवान को यह मंजूर नहीं था। बरसात में भूस्खलन की चपेट में आने से नया मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सास और अपने बच्चों के साथ अपने रिश्तेदार के घर में गुजर बसर कर रही हूं। घर बनाने के लिए कोई सुरक्षित जमीन उनके पास शेष नहीं रही है।
विज्ञापन
नन्हीं नितिका को 21 लाख रुपये देने की घोषणा, 7.95 लाख का चेक भी दिया
मंडी में तीन जिलों के आपदा प्रभावितों के लिए हुए आपदा राहत राशि वितरण समारोह में सीएम सुक्खू ने सबसे पहले आपदा में जान गंवाने वालों के लिए दो मिनट मौन रखवाया। इसकी शुरुआत भी खुद की और खुद ही समाप्त करवाया।
इसके बाद आपदा में अकेली रह गई सराज विधानसभा क्षेत्र की पंगलियुर निवासी नन्हीं नितिका को जनसहयोग से एकत्रित की गई 7.95 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने नितिका के लिए 21 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि निकिता जैसी बेटियां अकेली नहीं हैं और प्रदेश सरकार इन बच्चियों के साथ खड़ी है। सीएम ने साफ किया कि यह धनराशि सात लाख के अलावा दी गई है। यह एफडी भविष्य में नितिका के काम आएगी। इससे पहले उन्होंने बेटी नीतिका को दुलार किया। बता दें कि नितिका ने आपदा में अपने माता-पिता को खो दिया है और अब उसकी बुआ उसका पालन-पोषण कर रही है। पीएम नरेंद्र मोदी भी धर्मशाला में इस बेटी से मिलकर दुलार कर चुके हैं।
मंडी में तीन जिलों के आपदा प्रभावितों के लिए हुए आपदा राहत राशि वितरण समारोह में सीएम सुक्खू ने सबसे पहले आपदा में जान गंवाने वालों के लिए दो मिनट मौन रखवाया। इसकी शुरुआत भी खुद की और खुद ही समाप्त करवाया।
इसके बाद आपदा में अकेली रह गई सराज विधानसभा क्षेत्र की पंगलियुर निवासी नन्हीं नितिका को जनसहयोग से एकत्रित की गई 7.95 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने नितिका के लिए 21 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि निकिता जैसी बेटियां अकेली नहीं हैं और प्रदेश सरकार इन बच्चियों के साथ खड़ी है। सीएम ने साफ किया कि यह धनराशि सात लाख के अलावा दी गई है। यह एफडी भविष्य में नितिका के काम आएगी। इससे पहले उन्होंने बेटी नीतिका को दुलार किया। बता दें कि नितिका ने आपदा में अपने माता-पिता को खो दिया है और अब उसकी बुआ उसका पालन-पोषण कर रही है। पीएम नरेंद्र मोदी भी धर्मशाला में इस बेटी से मिलकर दुलार कर चुके हैं।
आंखों के सामने तिनके की तरह खड्ड के तेज बहाव में बह गया घर-जमीन
बरसात में आपदा के कहर का मंजर अपनी आंखों से देखने वाली सराज क्षेत्र के गुरनाल बूंग की राजकुमारी ने हिम्मत नहीं हारी है। आपदा राहत वितरण समारोह में बूंग रैलचौक से पड्डल मैदान पहुंची आपदा प्रभावित ने बताया कि 30 जून की उस काली रात को वह जिंदगीभर नहीं भुला पाएंगी।
राजकुमारी ने बताया कि 30 जून की रात वह भोजन के बाद सोने चली गईं। रात को सगे-संबंधियों ने फोन कर सूचना दी कि घर के बाहर बहने वाली खड्ड का पानी लगातार बढ़ रहा है। इसलिए सुरक्षित स्थान की ओर चले जाओ। चप्पल पहनकर वह किसी तरह घर से बाहर निकल पाई। उनकी आंखों के सामने घर तिनके की तरह खड्ड के तेज बहाव में बह गया। घर के साथ जमीन भी बह गई।
कहा रिश्तेदारों का फोन नहीं आता तो शायद मैं भी नहीं होती। बेटा अभेद यशुराज करसोग काॅलेज में एमए कर रहा है। घरबार सब कुछ आपदा में बह जाने के बाद बेटे ने बोला-मम्मी घर सहित जमीन व अन्य सामान बाढ़ में बह गया है। मैं अब पढ़ाई छोड़ दूं...। राजकुमारी ने बताया कि वह जैसे तैसे बेटे की पढ़ाई का खर्च तो वहन कर रही है, लेकिन घर बनाना उनके सामने चुनौती से कम नहीं है। पति पेड़ से गिरने के कारण बिस्तर पर हैं। फिर भी इस चुनौती से पार पाया जाएगा।
बरसात में आपदा के कहर का मंजर अपनी आंखों से देखने वाली सराज क्षेत्र के गुरनाल बूंग की राजकुमारी ने हिम्मत नहीं हारी है। आपदा राहत वितरण समारोह में बूंग रैलचौक से पड्डल मैदान पहुंची आपदा प्रभावित ने बताया कि 30 जून की उस काली रात को वह जिंदगीभर नहीं भुला पाएंगी।
राजकुमारी ने बताया कि 30 जून की रात वह भोजन के बाद सोने चली गईं। रात को सगे-संबंधियों ने फोन कर सूचना दी कि घर के बाहर बहने वाली खड्ड का पानी लगातार बढ़ रहा है। इसलिए सुरक्षित स्थान की ओर चले जाओ। चप्पल पहनकर वह किसी तरह घर से बाहर निकल पाई। उनकी आंखों के सामने घर तिनके की तरह खड्ड के तेज बहाव में बह गया। घर के साथ जमीन भी बह गई।
कहा रिश्तेदारों का फोन नहीं आता तो शायद मैं भी नहीं होती। बेटा अभेद यशुराज करसोग काॅलेज में एमए कर रहा है। घरबार सब कुछ आपदा में बह जाने के बाद बेटे ने बोला-मम्मी घर सहित जमीन व अन्य सामान बाढ़ में बह गया है। मैं अब पढ़ाई छोड़ दूं...। राजकुमारी ने बताया कि वह जैसे तैसे बेटे की पढ़ाई का खर्च तो वहन कर रही है, लेकिन घर बनाना उनके सामने चुनौती से कम नहीं है। पति पेड़ से गिरने के कारण बिस्तर पर हैं। फिर भी इस चुनौती से पार पाया जाएगा।