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HP High Court: हिमाचल हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, लोगों की सेहत से खिलवाड़ नहीं करेंगे बर्दाश्त, जानें मामला

Thu, 05 Dec 2024 09:24 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 05 Dec 2024 09:24 PM IST
सार

आईजीएमसी अस्पताल शिमला के ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों के जीवन के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal High Court strong comment will not tolerate playing with people health Trauma Center
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) एवं अस्पताल शिमला के ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों के जीवन के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की अदालत ने कहा कि हम सभी अधिकारी जनता के लिए काम करते हैं।

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अदालत ने विभाग से पूछा कि जनहित याचिका 2014 में दायर की गई है, उसके बाद 10 साल तक ट्रॉमा सेंटर को ठीक करने के लिए क्या किया। ट्रॉमा सेंटर में कितना नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल डॉक्टर और अन्य स्टाफ स्थायी तौर पर नियुक्त किया है, इसकी भी जानकारी मांगी। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर के लिए अलग से नर्सों का बंदोबस्त नहीं किया गया है। विभाग ने रिकॉर्ड पेश करते हुए कहा कि न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, प्लास्टिक सर्जन, लैब तकनीशियन, एमआरआई और मल्टी टास्क वर्करों की संख्या शून्य और रेडियोलोजिस्ट एक है। अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि विभाग इतना लापरवाह कैसे हो सकता है।

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सरकार ने कहा-31 मार्च तक दूर करेंगे कमियां
सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने कहा कि जल्द नर्सों के 110 और 1200 अन्य पद आउटसोर्स पर भरे जाएंगे। मशीनरी व उपकरण भी खरीदे जा रहे हैं। आउटसोर्स के स्थान पर नियमित भर्तियों के सवाल पर कहा कि सरकार स्थायी भर्तियां भी कर रही है, लेकिन तब तक काम चलाने के लिए आउटसोर्स पर नर्सें भर्ती होंगी। 31 मार्च 2025 तक विभाग सभी कमियों को दूर करने का हरसंभव प्रयास करेगा। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अस्पतालों के लिए 90 फीसदी अनुदान केंद्र सरकार देती है। इस राशि से विभाग अपनी मशीनें और उपकरण खरीदते हैं।

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प्रधानाचार्य ने मानी गलती, स्वास्थ्य सचिव को हलफनामा देने के आदेश
आईजीएमसी प्रधानाचार्य ने माना कि यह विभाग की गलती है और भविष्य में ऐसी गलती सुधारी जाएगी। अदालत ने अगली सुनवाई को स्वास्थ्य सचिव को व्यक्तिगत तौर पर हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी। अदालत में सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य सचिव एम सुधा देवी के अलावा निदेशक चिकित्सा शिक्षा और आईजीएमसी प्रधानाचार्य सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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