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HP High Court: राशन आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों पर हिमाचल हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Fri, 28 Nov 2025 04:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 28 Nov 2025 04:00 AM IST
सार

जिला मंडी में मृत लोगों के नाम पर राशन आवंटन मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal High Court seeks response from the government on allegations of corruption in ration allocation
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला मंडी में मृत लोगों के नाम पर राशन आवंटन मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता ने दायर आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मंडी जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) डिपो में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है। याचिका में दावा है कि मृतकों के नाम पर राशन का वितरण किया गया है। इस प्रक्रिया को अब भी चलाया जा रहा है।

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न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री (दस्तावेज/रिकॉर्ड) पर विस्तृत जवाब दाखिल करें। अदालत ने कहा कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो सरकार को तत्काल उचित कार्रवाई करनी होगी। मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को होगी।

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डेपुटेशन के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट ने फटकारा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों के डेपुटेशन से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने पाया कि शिक्षा विभाग के 86 और स्वास्थ्य विभाग के 123 कर्मचारी अपनी आधिकारिक पोस्टिंग स्थानों पर तैनात होने के बजाय अन्यत्र, खासकर शिमला जैसे शहरी क्षेत्रों में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।

अधिकारियों द्वारा दाखिल शपथ पत्रों से खुलासा हुआ कि डेपुटेशन की अवधि को सर्विस रिकॉर्ड में दर्शाया ही नहीं जाता है। रिकॉर्ड में अधिकारी को मूल स्थान पर ही तैनात माना जाता है, जबकि वह असल में दूसरी जगह ड्यूटी दे रहा होता है। इससे तबादला नीति को सीधे तौर पर प्रभावित किया जा रहा है।

गंभीर विसंगतियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे सरकारी स्तर पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं। मामले की सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
 

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने कहा कि डेपुटेशन की वर्तमान व्यवस्था से ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पोस्टिंग का उद्देश्य पूरी तरह विफल हो रहा है। अदालत ने कहा कि जो अधिकारी कठिन, दुर्गम, आदिवासी या ग्रामीण क्षेत्र में तैनात किए जाते हैं, वे प्रतिनियुक्ति लेकर शिमला जैसे शहरी क्षेत्रों में वापस आ जाते हैं, जबकि रिकॉर्ड में उन्हें अभी भी दुर्गम क्षेत्र में ही तैनात दिखाया जाता है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह व्यवस्था अधिकारियों को तीन तक लगातार पोस्टिंग शिमला में हासिल करने का अवसर दे रही है। इससे न केवल तबादला नीति की मूल भावना प्रभावित होती है, बल्कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था के कारण वहां के निवासियों को मूलभूत सेवाओं में कमी का सामना करना पड़ता है और नीति का उद्देश्य अप्रभावी हो रहा है। हाईकोर्ट ने ये टिप्पणियां एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।
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