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Himachal High Court: आदेशों के तथ्यों को छिपाने के मामले में पंचायतीराज सचिव अदालत में हुए पेश, जानें मामला

Thu, 10 Jul 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 10 Jul 2025 05:00 AM IST
सार

बुधवार को पंचायतीराज सचिव राजेश शर्मा व्यक्तिगत तौर पर हाईकोर्ट में पेश हुए। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने तथ्यों की पुष्टि करने के लिए ग्राम पंचायत धनेरी के सचिव और जिला पंचायती अधिकारी को दस्ती नोटिस जारी किए हैं। मामला विस्तार से जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal High Court Panchayati Raj Secretary appeared in court in the case of hiding the facts of the orders
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के एक मामले में पारित आदेशों के तथ्यों को छिपाने के मामले में बुधवार को पंचायतीराज सचिव राजेश शर्मा व्यक्तिगत तौर पर पेश हुए। पंचायतीराज सचिव ने न्यायालय को सूचित किया कि उनके समक्ष दायर की गई पुनरीक्षण याचिका में यह तथ्य छिपाया गया था कि संभागीय आयुक्त की ओर से पारित आदेश को इस न्यायालय ने एक सिविल रिट याचिका में बरकरार रखा था। जैसे ही उन्हें इस तथ्य का पता चला, उन्होंने तुरंत अपना आदेश वापस ले लिया, ताकि कानून का और दुरुपयोग न हो। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी है।

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न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने तथ्यों की पुष्टि करने के लिए ग्राम पंचायत धनेरी के सचिव और जिला पंचायती अधिकारी को दस्ती नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। अदालत ने अगली सुनवाई को ग्राम पंचायत प्रधान, सचिव और जिला अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

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उधर, ग्राम पंचायत की प्रधान भी अदालत में पेश हुईं। उन्होंने अदालत में हलफनामा दायर किया है। उन्होंने अदालत को बताया कि वह इस बात से अंजान थी। उसने संभागीय आयुक्त की ओर से पारित आदेश के खिलाफ सचिव (पंचायतीराज) के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जबकि उसने पहले इस न्यायालय में एक रिट याचिका के माध्यम से उसे सफलतापूर्वक चुनौती नहीं दी थी, लेकिन यह उसने संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव के साथ-साथ जिला पंचायत अधिकारी के कहने पर किया था। अदालत ने पंचायतीराज सचिव को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थिति से बाहर कर दिया है। हाईकोर्ट में यह याचिका ग्राम पंचायत के उपप्रधान की ओर से दायर की गई है।

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उपप्रधान को पंचायत से बर्खास्त कर दिया था। उपप्रधान ने इस आदेश को डिविजन कमीश्नर के समक्ष चुनौती दी थी। याचिका में बताया गया है कि प्रधान ने संभागीय आयुक्त के 4 सितंबर 2024 के आदेश के खिलाफ सीडब्ल्यूपी संख्या 11364/2024 दायर की थी। इस आदेश को हाईकोर्ट ने 14 अक्तूबर 2024 को बरकरार रखा था। प्रधान ने इस तथ्य को छिपाते हुए एक बार फिर संभागीय आयुक्त के 4 सितंबर 2024 के आदेश को पंचायतीराज सचिव के समक्ष पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी, जबकि उसे इस न्यायालय ने बरकरार रखा था और आपत्तिजनक आदेश के तहत, सचिव, पंचायती राज ने पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया और संभागीय आयुक्त की ओर से पारित आदेश को रद्द कर दिया। याचिका में प्रधान सहित अन्य प्रतिवादियों पर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए गए हैं।

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