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हिमाचल: ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत लेने वाले बर्खास्त कांस्टेबल को हाईकोर्ट से झटका, जानें पूरा मामला

Tue, 13 Oct 2026 07:29 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Oct 2026 07:29 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत के पैसे निजी गूगल पे अकाउंट पर लेने वाले बर्खास्त कांस्टेबल की अपील को खारिज कर दिया है। 

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Himachal: Dismissed constable, who took bribes by manipulating e challans, suffers setback in High Court
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत के पैसे निजी गूगल पे अकाउंट पर लेने वाले बर्खास्त कांस्टेबल की अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की नए सिरे से जांच कराने के अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराया है। उल्लेखनीय है कि कांस्टेबल जिला बिलासपुर में ट्रैफिक क्लर्क के पद पर तैनात था। 3 मई 2023 को ट्रैफिक पुलिस ने एक वाहन का चालान ड्रिंक एंड ड्राइव के तहत काटा था।

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यह चालान पुलिस स्तर पर कंपाउंड (समझौता) नहीं हो सकता था। आरोपी कांस्टेबल ने उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना ऑनलाइन ई-चालान एप में बदलाव कर दिए। उसने कोर्ट में फाइन की रकम को शून्य और 5,000 दर्शाया, जबकि वाहन चालक से उसके वकील के माध्यम से 20,000 की राशि अपने व्यक्तिगत गूगल पे अकाउंट पर ट्रांसफर करवा ली। जांच में पाया गया कि यह 20,000 की राशि सरकारी ट्रेजरी (खजाने) में जमा ही नहीं की गई थी। इसके बाद आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत एफआईआर दर्ज की गई। प्रारंभिक जांच के बाद दिसंबर 2023 में एसपी बिलासपुर ने कांस्टेबल को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।

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इस बर्खास्तगी के खिलाफ जब उसने पुलिस उपमहानिरीक्षक मंडी के समक्ष अपील की, तो डीआईजी ने पाया कि विभाग ने पंजाब पुलिस रूल्स के नियम 16.38 का तकनीकी रूप से पालन नहीं किया है इस तकनीकी खामी के आधार पर डीआईजी ने पुरानी विभागीय जांच को रद्द कर दिया और नियम 16.38 के तहत नए सिरे से जांच के आदेश दे दिए। कांस्टेबल ने नए सिरे से जांच कराने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दलील दी गई कि जब एक बार जांच रद्द हो गई है तो दोबारा जांच नहीं होनी चाहिए। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी आधार पर पिछली जांच रद्द होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आरोपी को क्लीन चिट मिल गई है।

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