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Himachal News : मत्स्य आखेट पर हिमाचल में शुक्रवार से प्रतिबंध होगा खत्म, अवैध शिकार के 610 मामले पकड़े

Thu, 14 Aug 2025 10:56 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 14 Aug 2025 10:56 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार से मत्स्य आखेट पर चल रहा दो माह का प्रतिबंध खत्म हो जाएगा। उधर, मछुआरों ने प्रतिबंध खत्म होने के बाद मत्स्य आखेट के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Ban on fishing will end from Friday 610 cases of illegal hunting caught
गोबिंद सागर झील बिलासपुर। - फोटो : संवाद

विस्तार

प्रदेश भर के जलाशयों में शुक्रवार से मत्स्य आखेट पर चल रहा दो माह का प्रतिबंध खत्म हो जाएगा। मत्स्य विभाग ने 15 जून से 15 अगस्त तक मत्स्य आखेट पर प्रतिबंध लगाया था।

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प्रतिबंध के दौरान मत्स्य विभाग ने अवैध शिकार के रिकॉर्ड 610 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में उल्लंघनकर्ताओं से कुल 5,58,300 रुपये का जुर्माना वसूला गया है। अवैध शिकार के सबसे अधिक 188 मामले में पोंग बांध में दर्ज किए हैं, जिनमें 2,02,750 रुपये जुर्माना वसूला गया है। बिलासपुर में दर्ज 110 मामलों में 96,050 रुपये, मंडी में दर्ज 87 मामलों में 89,800 रुपये, चंबा में दर्ज 49 मामलों में 37,600 रुपये, पतलीकूहल में दर्ज 38 मामलों में 34,200 रुपये, सोलन में दर्ज 46 मामलों में 23,500 रुपये, सिरमौर में दर्ज 26 मामलों में 11,700 रुपये, शिमला में दर्ज आठ मामलों में 5500 रुपये, ऊना में दर्ज सात मामलों में 13,200 रुपये और कांगड़ा में दर्ज 51 मामलों में 44,00 रुपये जुर्माना वसूला गया है। इसके अलावा विभाग ने 1 अप्रैल से 15 जून तक अवैध शिकार के 109 मामले दर्ज किए थे, जिसमें 66,500 रुपये जुर्माना वसूला है। पिछले साल मत्स्य विभाग ने अवैध शिकार के 442 मामले दर्ज कर 2.93 लाख रुपये जुर्माना वसूला था।

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उधर, मछुआरों ने प्रतिबंध खत्म होने के बाद मत्स्य आखेट के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। उन्होंने गोबिंद सागर झील में तैरती हुए बोतलें लगाकर अपने क्षेत्र निर्धारित कर लिए हैं। इसके अलावा कश्तियों और जाल की भी मरम्मत की जा रही है। मछुआरे शुक्रवार रात से जाल लगाना शुरू कर देंगे। बता दें कि पांच प्रमुख जलाशय गोबिंद सागर झील, पौंग डैम, चमेरा, कोलडैम और रणजीत सागर सहित अन्य नदियों और खड्डों में छह लाख किलोग्राम से अधिक मछली का उत्पादन होता है। इन जलाशयों से करीब 6 हजार पंजीकृत मछुआरे मत्स्य आखेट करते हैं।

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प्रदेश के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से दो माह प्रतिबंध लगाया जाता है। पिछले कुछ साल से मत्स्य उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी वर्षों में भी मछली उत्पादन में और वृद्धि होगी। - विवेक चंदेल, निदेशक, मत्स्य विभाग
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