हिमाचल: एचआरटीसी कर्मचारियों के बकाया भुगतान से जुड़े सभी मामलों की एक साथ होगी सुनवाई
प्रदेश हाईकोर्ट ने एचआरटीसी के कर्मचारियों के लंबित एरियर और वित्तीय लाभों के भुगतान से जुड़ी दर्जनों निष्पादन याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचआरटीसी के कर्मचारियों के लंबित एरियर और वित्तीय लाभों के भुगतान से जुड़ी दर्जनों निष्पादन याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एकरूपता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विरोधाभास से बचने के लिए अन्य अदालतों में लंबित इस तरह के सभी मामलों को एक साथ मुख्य मामले के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अदालत ने निगम को एक नया हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि कुल कितनी राशि बकाया है, कितनी राशि दी जा चुकी है और भुगतान के लिए प्रतिशत तय करने का क्या तरीका अपनाया गया है। अब इन सभी मामलों पर अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सरकार और निगम की ओर से हलफनामा पेश किया गया। कोर्ट को बताया गया कि दिसंबर 2025 तक कुल 659 कर्मियों में से 509 को एरियर की पहली किस्त मिल चुकी थी। ताजा रिपोर्ट के अनुसार 30 अप्रैल 2026 तक निगम द्वारा लगभग 22.50 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 144 कर्मचारियों (याचिकाकर्ताओं व गैर-याचिकाकर्ताओं) को दूसरी किस्त भी जारी कर दी गई है। एचआरटीसी प्रबंधन ने अदालत को आश्वस्त किया है कि कर्मचारियों का पूरा बकाया मार्च 2028 तक पूरी तरह से चुका दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव और एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक द्वारा दायर हलफनामों में निगम पर वित्तीय बोझ का भी जिक्र किया गया।
होमगार्ड्स का वेतन अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन, सरकार को जारी हुआ नोटिस
प्रदेश हाईकोर्ट ने हिम क्वीन डिस्टिलर्स एंड बॉटलर्स की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता की इकाई में तैनात दो होमगार्ड्स के वेतन का जो भी भुगतान अब तक किया गया है या भविष्य में किया जाएगा, वह इस रिट याचिका के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता यह केस जीत जाता है, तो राज्य सरकार को ब्याज सहित वह पूरी राशि वापस लौटानी होगी।अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।