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HP High Court: चमियाना अस्पताल में असुविधाओं पर स्वास्थ्य और पीडब्ल्यूडी सचिव को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश

Fri, 28 Nov 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 28 Nov 2025 02:00 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में सुविधाओं की कमी को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर चिंता जताई है। पढ़ें पूरी खबर...

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Health and PWD secretaries ordered to appear before HP High Court over inconveniences at Chamiyana Hospital
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में असुविधाओं और कार्य की धीमी गति पर स्वास्थ्य एवं लोक निर्माण विभाग के सचिव को तलब किया है। हाईकोर्ट ने सुविधाओं की कमी को लेकर राज्य सरकार के रवैये पर गंभीर चिंता जताई है। हाईकोर्ट ने अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों को आ रहीं दिक्कतें दूर करने के लिए अगली सुनवाई में स्वास्थ्य सचिव एम सुधा देवी और पीडब्ल्यूडी सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।

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सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से पार्किंग, स्ट्रीट लाइटों की कमी, सड़क की खराब हालत, ब्लड स्टोरेज यूनिट का अभाव और अन्य बुनियादी ढांचे के बारे में अवगत कराया गया। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि राज्य का इरादा इस अस्पताल को प्रीमियम संस्थान बनाने का है, लेकिन संपर्क मार्ग खस्ताहाल होने के कारण मरीजों और तीमारदारों को संस्थान तक पहुंचना ही मुश्किल हो रहा है। न्यायालय डेढ़ साल से अस्पताल में सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए भरपूर प्रयास और सहयोग कर रहा है, लेकिन कोई पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। अदालत ने न्याय मित्रों से इस पर सुझाव प्रस्तुत करने का अनुरोध किया। अगली सुनवाई 29 दिसंबर को होगी।

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न्यायालय को बताया गया कि अस्पताल तक जाने वाली सड़क की हालत दयनीय है। यह यातायात के भारी प्रवाह को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है। पिछले आदेश में सड़क सुधार, सराय भवन के निर्माण, बिजली के खंभों को हटाने और तीन किलोमीटर के रास्ते पर स्ट्रीट लाइट लगाने के निर्देश दिए गए थे। बिजली के 32 खंभों के स्थानांतरण और भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर भी आदेश दिए गए थे। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से मरीजों के लिए 1,000 वाहनों और स्टाफ के लिए 400 वाहनों की क्षमता वाली पार्किंग सुविधा बनाने का अनुरोध 6 सितंबर 2024 को किया था, लेकिन इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है।

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स्वास्थ्य सचिव की ओर से 24 नवंबर को हलफनामा दाखिल किया गया। इसमें बताया गया कि अस्पताल में सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को 300 वाहन और बाकी दिनों में लगभग 100 वाहन आते हैं। इसके विपरीत पार्किंग की सुविधा केवल 60 वाहनों के लिए है, जो पहले से ही लगभग 70 फैकल्टी/स्टाफ के वाहनों से भरी रहती है।

सड़क पर 200 वाहन पार्क करने का सुझाव व्यावहारिक नहीं
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भट्ठाकुफर की ओर जाने वाली एक्सेस (पहुंच) रोड पर 200 वाहनों को खड़ा करने का सुझाव व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इससे रास्ता और तंग होगा। रक्त भंडारण इकाई के मुद्दे पर जवाब दिया गया कि एक पूर्ण कार्यात्मक ब्लड बैंक निर्माणाधीन एडिशनल ब्लॉक में प्रस्तावित है, जिसका निर्माण 30 जून तक पूरा होगा। स्टाफ के लिए छात्रावास, प्रिंसिपल और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के लिए आवासीय आवास (टाइप एक से चार), वाणिज्यिक परिसर, पार्किंग और काॅमर्शियल सराय की आवश्यकता के संबंध में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को लिखा था।

ऊंचाई को फिर से मापने के लिए डीजीपी नया चिकित्सा बोर्ड करें गठित : हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ऊंचाई मापने में कथित अनियमितताओं के मामले में डीजीपी को दो दिनों के भीतर नया चिकित्सा बोर्ड गठित कर फिर नाप मपाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायाधीश ज्योत्सना रिवॉल दुआ की खंडपीठ ने दिया। अदालत ने अधिकारियों को अगली सुनवाई पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को भी कहा है। मामले की सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

याचिकाकर्ता ने शिकायत की थी कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उसकी वास्तविक ऊंचाई को अंक देने में त्रुटि हुई। 4 अक्तूबर 2024 के विज्ञापन के पैरा-जी के अनुसार 5’-7” से 5’-8” से कम ऊंचाई वाले उम्मीदवारों को एक अंक दिया जाना अनिवार्य है। जबकि 5’-7” से कम ऊंचाई होने पर कोई अंक नहीं दिया जाता।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि उसे 5’-7” से कम ऊंचाई का मानकर कोई अंक नहीं दिया गया, जबकि माप पुलिस महानिदेशक की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार चिकित्सा अधिकारी द्वारा किया जाना चाहिए था। अदालत ने टिप्पणी की कि फरवरी 2025 में हुई वर्तमान भर्ती प्रक्रिया के लिए किसी उम्मीदवार की ऊंचाई कम होना संभव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए पुनर्माप आवश्यक है।
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