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तापमान बढ़ने से सूखने लगी गेहूं की फसल
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रंगस क्षेत्र में बारिश न होने के चलते सूखने की कगार पर पहुंची गेहूं की फसल।
- फोटो : Hamirpur-HP
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रंगस (नादौन)। गर्मी बढ़ने के कारण मार्च के अंत में ही ऐसा महसूस हो रहा है कि जून महीना हो। मौजूदा समय में ही तापमान 35 और 38 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है। इससे गेहूं की फसल समय से पहले सूखने लगी है। इसके अलावा पर नदी और नालों का जल स्तर भी काफी घट गया है। काफी समय से क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है। हमीरपुर के अधिकांश क्षेत्रों में खेतीबाड़ी पर निर्भर है। यहां पर सिंचाई की बहुत कम सुविधा है।
किसान ज्ञानचंद, रघुनाथ, सोहन सिंह और जगत राम का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण गेहूं की फसल समय से पहले ही गर्मी के बढ़ने से पकने लगी है। इससे अंदेशा है कि बारिश के न होने से और समय से पहले फसल के पकने से पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है जोकि किसानों के लिए चिंता का विषय है।
यही नहीं गांव के आसपास नालों के ऊपर बने चेकडैम जिनसे आमतौर पर किसान सिंचाई करते हैं वह भी सूखते जा रहे हैं। इससे फिर किसानों को मिलने वाली भूमि के लिए सिंचाई सुविधा से भी वंचित रहना पड़ेगा। यही नहीं जलस्तर के कम होने से भविष्य में पेयजल की समस्या भी गहरा सकती है। किसान विधि चंद, सुरेश ठाकुर, प्रदीप कुमार, अशोक कुमार, प्रताप चंद और मस्त राम ने सरकार से मांग की कि समय से पहले अचानक बढ़ने वाली गर्मी से किसानों के नुकसान को ध्यान में रखते हुए राहत के तौर पर मदद की जाए।
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इसी संदर्भ में नादौन विषय बाग विशेषज्ञ सुरेश धीमान का कहना है कि बढ़ते तापमान से फसल के समय से पूर्व पकने से पैदावार में गिरावट आ सकती है। आमतौर पर किसानों ने फसल बीमा करवाया होता है। इसमें फसल की कटाई के बाद कृषि विभाग, राजस्व विभाग की ओर से सर्वे किया जा जाता है। इससे किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कर ली जाती है।
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किसान ज्ञानचंद, रघुनाथ, सोहन सिंह और जगत राम का कहना है कि बढ़ते तापमान के कारण गेहूं की फसल समय से पहले ही गर्मी के बढ़ने से पकने लगी है। इससे अंदेशा है कि बारिश के न होने से और समय से पहले फसल के पकने से पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है जोकि किसानों के लिए चिंता का विषय है।
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यही नहीं गांव के आसपास नालों के ऊपर बने चेकडैम जिनसे आमतौर पर किसान सिंचाई करते हैं वह भी सूखते जा रहे हैं। इससे फिर किसानों को मिलने वाली भूमि के लिए सिंचाई सुविधा से भी वंचित रहना पड़ेगा। यही नहीं जलस्तर के कम होने से भविष्य में पेयजल की समस्या भी गहरा सकती है। किसान विधि चंद, सुरेश ठाकुर, प्रदीप कुमार, अशोक कुमार, प्रताप चंद और मस्त राम ने सरकार से मांग की कि समय से पहले अचानक बढ़ने वाली गर्मी से किसानों के नुकसान को ध्यान में रखते हुए राहत के तौर पर मदद की जाए।
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इसी संदर्भ में नादौन विषय बाग विशेषज्ञ सुरेश धीमान का कहना है कि बढ़ते तापमान से फसल के समय से पूर्व पकने से पैदावार में गिरावट आ सकती है। आमतौर पर किसानों ने फसल बीमा करवाया होता है। इसमें फसल की कटाई के बाद कृषि विभाग, राजस्व विभाग की ओर से सर्वे किया जा जाता है। इससे किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कर ली जाती है।