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Hamirpur (Himachal) News: गांव शहर में शामिल होकर योजनाओं से हुए दूर, गरीबों को नहीं मिल रहा लाभ
Wed, 12 Aug 2026 01:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 12 Aug 2026 01:18 AM IST
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हमीरपुर। नगर परिषद हमीरपुर को नगर निगम बने करीब दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन निगम में शामिल गांवों के गरीब परिवारों को शहरी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। निगम का दायरा बढ़ाते हुए 14 पंचायतों को पूर्ण और आंशिक रूप से इसमें शामिल किया गया था।
इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां समाप्त हो गईं। अब पात्र लोग बीपीएल और आईआरडीपी सूची में नाम जुड़वाने के लिए न तो पंचायत का दरवाजा खटखटा सकते हैं और न ही नगर निगम में नाम शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ पा रही है।
नगर निगम में चुनाव न होने के कारण करीब दो साल से निर्वाचित हाउस भी अस्तित्व में नहीं है। नए पात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत चर्चा और सहमति जरूरी है, लेकिन निर्वाचित हाउस न होने से यह प्रक्रिया अटकी हुई है।
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इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सरकारी सहायता से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीण व्यवस्था खत्म होने के बाद नए शहरी क्षेत्रों के लोगों को अब प्रतिनिधित्व और जरूरी सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
राशन से लेकर आवास तक प्रभावित
बीपीएल और आईआरडीपी सूची में नाम होने से पात्र परिवारों को राशन, शिक्षा, विवाह सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा, आवास तथा रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलता है। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीब परिवारों को आर्थिक सहारा देकर आत्मनिर्भर बनाना है। नए शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों के नाम इन सूचियों में नहीं जुड़ पा रहे हैं। पहले नए लाभार्थियों को शामिल करने का मामला ग्राम सभा में रखा जाता था और पात्रता के आधार पर लोगों की सहमति से सूची में नाम जोड़े जाते थे। नगर निगम में निर्वाचित हाउस नहीं होने के कारण करीब दो साल से यह प्रक्रिया ठप है। इससे पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
तीन साल तक टैक्स नहीं, लेकिन प्रतिनिधित्व भी नहीं
नगर निगम के गठन के बाद सरकार ने निगम क्षेत्र में तीन साल तक कोई टैक्स नहीं लगाने का फैसला लिया था। लोगों को उम्मीद थी कि शहर में शामिल होने के साथ उन्हें बेहतर सुविधाएं और प्रतिनिधित्व मिलेगा। करीब दो साल बीतने के बाद भी निगम के चुनाव नहीं होने से लोगों की समस्याएं उठाने के लिए चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं।
कोट
नगर निगम के चुनाव न होने के कारण प्रतिनिधि नहीं चुने जा सके हैं। अधिकारियों को बीपीएल या आईआरडीपी सूची में लोगों के नाम दर्ज करने की शक्तियां प्रदान नहीं की गई हैं।
-राकेश कुमार शर्मा, आयुक्त, नगर निगम हमीरपुर
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इसके साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों की शक्तियां समाप्त हो गईं। अब पात्र लोग बीपीएल और आईआरडीपी सूची में नाम जुड़वाने के लिए न तो पंचायत का दरवाजा खटखटा सकते हैं और न ही नगर निगम में नाम शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ पा रही है।
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नगर निगम में चुनाव न होने के कारण करीब दो साल से निर्वाचित हाउस भी अस्तित्व में नहीं है। नए पात्र व्यक्ति का नाम सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत चर्चा और सहमति जरूरी है, लेकिन निर्वाचित हाउस न होने से यह प्रक्रिया अटकी हुई है।
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इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सरकारी सहायता से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीण व्यवस्था खत्म होने के बाद नए शहरी क्षेत्रों के लोगों को अब प्रतिनिधित्व और जरूरी सुविधाओं के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
राशन से लेकर आवास तक प्रभावित
बीपीएल और आईआरडीपी सूची में नाम होने से पात्र परिवारों को राशन, शिक्षा, विवाह सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा, आवास तथा रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलता है। इन योजनाओं का उद्देश्य गरीब परिवारों को आर्थिक सहारा देकर आत्मनिर्भर बनाना है। नए शहरी क्षेत्रों में पात्र परिवारों के नाम इन सूचियों में नहीं जुड़ पा रहे हैं। पहले नए लाभार्थियों को शामिल करने का मामला ग्राम सभा में रखा जाता था और पात्रता के आधार पर लोगों की सहमति से सूची में नाम जोड़े जाते थे। नगर निगम में निर्वाचित हाउस नहीं होने के कारण करीब दो साल से यह प्रक्रिया ठप है। इससे पात्र परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
तीन साल तक टैक्स नहीं, लेकिन प्रतिनिधित्व भी नहीं
नगर निगम के गठन के बाद सरकार ने निगम क्षेत्र में तीन साल तक कोई टैक्स नहीं लगाने का फैसला लिया था। लोगों को उम्मीद थी कि शहर में शामिल होने के साथ उन्हें बेहतर सुविधाएं और प्रतिनिधित्व मिलेगा। करीब दो साल बीतने के बाद भी निगम के चुनाव नहीं होने से लोगों की समस्याएं उठाने के लिए चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हैं।
कोट
नगर निगम के चुनाव न होने के कारण प्रतिनिधि नहीं चुने जा सके हैं। अधिकारियों को बीपीएल या आईआरडीपी सूची में लोगों के नाम दर्ज करने की शक्तियां प्रदान नहीं की गई हैं।
-राकेश कुमार शर्मा, आयुक्त, नगर निगम हमीरपुर