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Hamirpur (Himachal) News: अल्ट्रासाउंड मशीन खराब, मरीजों को हफ्तेभर का इंतजार
Tue, 31 Mar 2026 04:34 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 31 Mar 2026 04:34 AM IST
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सचित्र
हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवा सेवाएं प्रभावित
आपात स्थिति वाले मरीजों को लेना पड़ रहा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हमीरपुर स्थित डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। कॉलेज में उपलब्ध दो अल्ट्रासाउंड मशीनों में से एक खराब होने के कारण मरीजों पर असर पड़ रहा है। अब एक ही मशीन पर बढ़ते दबाव के चलते मरीजों को जांच के लिए एक सप्ताह या उससे अधिक समय बाद की तिथि दी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 ओपीडी होती है, जबकि रोजाना 30 से अधिक गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। ऐसे में एक मशीन के खराब होने से व्यवस्था प्रभावित हो गई है और आपात स्थिति वाले मरीजों के लिए यह इंतजार गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
स्थिति से परेशान होकर कई मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें 1000 से 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि खराब मशीन को जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि उन्हें समय पर जांच की सुविधा मिल सके।
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बॉक्स
निजी संस्थानों पर बढ़ी निर्भरता
अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों की निर्भरता सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर अधिक बढ़ रही है। वर्ष 2025 में सरकारी संस्थानों में 5,541 अल्ट्रासाउंड किए गए, जबकि निजी संस्थानों में यह संख्या 19,891 रही। बेहतर सुविधाओं के चलते मरीज निजी संस्थानों की ओर अधिक रुख कर रहे हैं।
कोट
-अल्ट्रासाउंड मशीन के खराब होने की समस्या ध्यान में है। मशीन की जल्द ही मरम्मत करवा ली जाएगी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ओपीडी पर्ची काउंटर पर पर्ची बनाते मरीज। संवाद
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हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवा सेवाएं प्रभावित
आपात स्थिति वाले मरीजों को लेना पड़ रहा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। हमीरपुर स्थित डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इन दिनों चिंताजनक बनी हुई है। कॉलेज में उपलब्ध दो अल्ट्रासाउंड मशीनों में से एक खराब होने के कारण मरीजों पर असर पड़ रहा है। अब एक ही मशीन पर बढ़ते दबाव के चलते मरीजों को जांच के लिए एक सप्ताह या उससे अधिक समय बाद की तिथि दी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 ओपीडी होती है, जबकि रोजाना 30 से अधिक गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। ऐसे में एक मशीन के खराब होने से व्यवस्था प्रभावित हो गई है और आपात स्थिति वाले मरीजों के लिए यह इंतजार गंभीर समस्या बनता जा रहा है।
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स्थिति से परेशान होकर कई मरीजों को निजी स्वास्थ्य संस्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां उन्हें 1000 से 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि खराब मशीन को जल्द से जल्द ठीक किया जाए, ताकि उन्हें समय पर जांच की सुविधा मिल सके।
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निजी संस्थानों पर बढ़ी निर्भरता
अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों की निर्भरता सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी स्वास्थ्य संस्थानों पर अधिक बढ़ रही है। वर्ष 2025 में सरकारी संस्थानों में 5,541 अल्ट्रासाउंड किए गए, जबकि निजी संस्थानों में यह संख्या 19,891 रही। बेहतर सुविधाओं के चलते मरीज निजी संस्थानों की ओर अधिक रुख कर रहे हैं।
कोट
-अल्ट्रासाउंड मशीन के खराब होने की समस्या ध्यान में है। मशीन की जल्द ही मरम्मत करवा ली जाएगी। -डॉ. देशराज शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज हमीरपुर
मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ओपीडी पर्ची काउंटर पर पर्ची बनाते मरीज। संवाद