{"_id":"66532c797be6530a46016342","slug":"ultrasound-being-done-once-a-week-in-barsar-hospital-hamirpur-hp-news-c-94-1-ssml1011-128407-2024-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: बड़सर अस्पताल में सप्ताह में एक दिन हो रहे अल्ट्रासाउंड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: बड़सर अस्पताल में सप्ताह में एक दिन हो रहे अल्ट्रासाउंड
Mon, 27 May 2024 06:03 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 27 May 2024 06:03 AM IST
विज्ञापन
बड़सर (हमीरपुर)। नागरिक अस्पताल बड़सर में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पिछले तीन साल से रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। स्वास्थ्य विभाग प्रतिनियुक्ति पर रेजियोलॉजिस्ट भेजकर सप्ताह में एक दिन यानी मंगलवार को अल्ट्रासाउंड सेवाएं बहाल कर रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी लैब में भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों विमल दास, राम दास, नरैण सिंह, प्रकाश ठाकुर, अनिल कुमार, राकेश, सावित्री और तनेश कुमारी आदि ने कहा कि वर्ष 2016-17 में दर्जा बढ़ाकर नागरिक अस्पताल बनाया गया। इसमें 50 बिस्तरों की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के आस जगी थी, लेकिन हालत यह हैं कि दर्जा तो बड़ा है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की आज भी नहीं सुधरी है।
उन्होंने कहा कि बड़सर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है, लेकिन टेस्ट करने के लिए कोई स्थायी रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। अस्पताल में अन्य दूसरे अस्पतालों से हर महीने चार दिन के लिए प्रतिनियुक्ति पर रेडियोलॉजिस्ट भेजा जाता है। इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में महंगे दाम पर निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता हैं।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि नागरिक अस्पताल बड़सर में पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 30 पद स्वीकृत हैं। मगर हैरानी की बात है कि इनमें से केवल आठ पद ही भरे हैं और 22 पद अभी भी खाली चर रहे हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के छह पद स्वीकृत हैं और चिंता की बात यह है कि नागरिक अस्पताल बड़सर में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है।
बीएमओ बड़सर डॉ. बृजेश शर्मा ने कहा कि जो रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड करने के लिए आते हैं। उन्हें जिले के अन्य अस्पतालों में जाकर भी अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं, और ऐसे में निर्धारित तिथि के आधार पर लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए बुलाया जाता है। किसी दिन अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट मौजूद रहेंगे, इसके बारे में लोगों को पहले ही जानकारी दे दी जाती है।
विज्ञापन
स्थानीय लोगों विमल दास, राम दास, नरैण सिंह, प्रकाश ठाकुर, अनिल कुमार, राकेश, सावित्री और तनेश कुमारी आदि ने कहा कि वर्ष 2016-17 में दर्जा बढ़ाकर नागरिक अस्पताल बनाया गया। इसमें 50 बिस्तरों की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने के आस जगी थी, लेकिन हालत यह हैं कि दर्जा तो बड़ा है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं की आज भी नहीं सुधरी है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि बड़सर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीन तो है, लेकिन टेस्ट करने के लिए कोई स्थायी रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है। अस्पताल में अन्य दूसरे अस्पतालों से हर महीने चार दिन के लिए प्रतिनियुक्ति पर रेडियोलॉजिस्ट भेजा जाता है। इससे मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आपात स्थिति में महंगे दाम पर निजी लैब में अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता हैं।
विज्ञापन
लोगों का कहना है कि नागरिक अस्पताल बड़सर में पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 30 पद स्वीकृत हैं। मगर हैरानी की बात है कि इनमें से केवल आठ पद ही भरे हैं और 22 पद अभी भी खाली चर रहे हैं। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के छह पद स्वीकृत हैं और चिंता की बात यह है कि नागरिक अस्पताल बड़सर में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है।
बीएमओ बड़सर डॉ. बृजेश शर्मा ने कहा कि जो रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड करने के लिए आते हैं। उन्हें जिले के अन्य अस्पतालों में जाकर भी अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं, और ऐसे में निर्धारित तिथि के आधार पर लोगों को अल्ट्रासाउंड के लिए बुलाया जाता है। किसी दिन अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट मौजूद रहेंगे, इसके बारे में लोगों को पहले ही जानकारी दे दी जाती है।