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Hamirpur (Himachal) News: विद्यार्थियों को बगड़ घास से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
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बगड़ घास हस्तकला को पुनर्जीवित करने के लिए कार्य कर रहीं मंजरी महाजन
वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए 1500 लोगों तक बनाई पहुंच
संवाद न्यूज एजेंसी
सुजानपुर (हमीरपुर)। एनजीओ अर्थ जस्ट और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के सहयोग से ऑनलाइन कम्यूनिकेशन सीरीज का आयोजन किया जा रहा है। इस सीरीज में वीरवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भलेठ की प्रधानाचार्य मंजरी वी महाजन ने बगड़ घास पर प्रस्तुति दी। महाजन बगड़ घास हस्तकला को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रही हैं। बगड़ घास हस्तशिल्प को जीवंत रखने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को इस कला से जोड़ने का प्रयास किया है। वह पिछले कुछेक समय से विद्यार्थियों को इस कला के कारीगरों से मिलवाने का कार्य कर रही हैं।
कारीगर विद्यार्थियों को बगड़ घास से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। महाजन ने 2 गांवों को सक्रिय रूप से शामिल किया है और 400 विद्यार्थियों, स्थानीय कारीगरों, शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ, पंचायत सदस्यों और व्यापक समुदाय के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा दिया है। शिल्प शिक्षा और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया है। स्थानीय हस्तशिल्प और वोकल फॉर लोकल पहल को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों में उन्होंने 1500 लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है। प्रस्तुति के दौरान हमीरपुर से जिला विज्ञान पर्यवेक्षक राजेश गौतम ने पारंपरिक हस्तशिल्प के पुनर्जीवन और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है। मंजरी महाजन सतत शिक्षक समुदाय की सदस्य हैं। सतत शिक्षक समुदाय अर्थ जस्ट और प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के की ओर से 2022 में सस्टेनेबिलिटी (प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल) की संस्कृति को फिर से संजीवनी देने और शिक्षा क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी चैंपियनों का एक जीवनभर का समुदाय बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह समुदाय प्रदेश के 8 जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 34 शिक्षकों का एक समुदाय बन चुका है।
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वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने के लिए 1500 लोगों तक बनाई पहुंच
संवाद न्यूज एजेंसी
सुजानपुर (हमीरपुर)। एनजीओ अर्थ जस्ट और हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के सहयोग से ऑनलाइन कम्यूनिकेशन सीरीज का आयोजन किया जा रहा है। इस सीरीज में वीरवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भलेठ की प्रधानाचार्य मंजरी वी महाजन ने बगड़ घास पर प्रस्तुति दी। महाजन बगड़ घास हस्तकला को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रही हैं। बगड़ घास हस्तशिल्प को जीवंत रखने के लिए स्कूली विद्यार्थियों को इस कला से जोड़ने का प्रयास किया है। वह पिछले कुछेक समय से विद्यार्थियों को इस कला के कारीगरों से मिलवाने का कार्य कर रही हैं।
कारीगर विद्यार्थियों को बगड़ घास से विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दे रहे हैं। महाजन ने 2 गांवों को सक्रिय रूप से शामिल किया है और 400 विद्यार्थियों, स्थानीय कारीगरों, शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ, पंचायत सदस्यों और व्यापक समुदाय के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा दिया है। शिल्प शिक्षा और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया है। स्थानीय हस्तशिल्प और वोकल फॉर लोकल पहल को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों में उन्होंने 1500 लोगों तक अपनी पहुंच बनाई है। प्रस्तुति के दौरान हमीरपुर से जिला विज्ञान पर्यवेक्षक राजेश गौतम ने पारंपरिक हस्तशिल्प के पुनर्जीवन और उनके बारे में जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है। मंजरी महाजन सतत शिक्षक समुदाय की सदस्य हैं। सतत शिक्षक समुदाय अर्थ जस्ट और प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद के की ओर से 2022 में सस्टेनेबिलिटी (प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल) की संस्कृति को फिर से संजीवनी देने और शिक्षा क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी चैंपियनों का एक जीवनभर का समुदाय बनाने के लिए शुरू किया गया था। यह समुदाय प्रदेश के 8 जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले 34 शिक्षकों का एक समुदाय बन चुका है।
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