{"_id":"66d320513ac9938374077cfc","slug":"training-given-for-early-identification-of-tb-patients-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1001-134780-2024-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए दिया प्रशिक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए दिया प्रशिक्षण
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। जिला हमीरपुर में टीबी निदान को लेकर देरी कम करने के लिए टीफा प्रोजेक्ट के अंतर्गत शनिवार को जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के मीटिंग कक्ष में इस प्रशिक्षण कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने की। कार्यशाला में आयुष विभाग, जिला केमिस्ट एसोसिएशन, ड्रग इंस्पेक्टरों, ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों तथा जिला एवं खंडों से एनटीईपी स्टाफ ने भाग लिया। इस टीफा प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी जपाइगो प्रवीण चौहान ने प्रशिक्षण दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला का लक्ष्य हमीरपुर जिला में टीबी का पता लगाने और निदान को मजबूत करने के लिए प्रयास करना है। भारत में 70 फीसदी लोग टीबी के लक्षणों का अनुभव होने पर शुरू में केमिस्ट व आयुष चिकित्सकों और नजदीकी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से सहायता लेते हैं। इस कारण लक्षण होने पर इलाज में देरी होती है। टीआईईएफ एक अनूठी योजना है तथा हिमाचल पहला राज्य है जहां इसे शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर अभ्यास के लिए जिले के प्रत्येक ब्लाक में जपाइगो के सहयोग से प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जाएगा। सभी हितधारकों को टीबी की शीघ्र पहचान में तेजी लाने के लिए एंटीईपी में शामिल किया गया है और संभावित टीबी मामलों की पहचान करने के लिए कफ सिरप की बिक्री को ट्रैक करने के लिए निगरानी तंत्र और रिपोर्ट करने के लिए प्रदाता स्तर पर एक डिजिटल रूप से सक्षम निगरानी प्रणाली लागू की गई है।
विज्ञापन
हमीरपुर। जिला हमीरपुर में टीबी निदान को लेकर देरी कम करने के लिए टीफा प्रोजेक्ट के अंतर्गत शनिवार को जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के मीटिंग कक्ष में इस प्रशिक्षण कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने की। कार्यशाला में आयुष विभाग, जिला केमिस्ट एसोसिएशन, ड्रग इंस्पेक्टरों, ब्लॉक मेडिकल अधिकारियों तथा जिला एवं खंडों से एनटीईपी स्टाफ ने भाग लिया। इस टीफा प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला में जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुनील वर्मा तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी जपाइगो प्रवीण चौहान ने प्रशिक्षण दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला का लक्ष्य हमीरपुर जिला में टीबी का पता लगाने और निदान को मजबूत करने के लिए प्रयास करना है। भारत में 70 फीसदी लोग टीबी के लक्षणों का अनुभव होने पर शुरू में केमिस्ट व आयुष चिकित्सकों और नजदीकी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से सहायता लेते हैं। इस कारण लक्षण होने पर इलाज में देरी होती है। टीआईईएफ एक अनूठी योजना है तथा हिमाचल पहला राज्य है जहां इसे शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर अभ्यास के लिए जिले के प्रत्येक ब्लाक में जपाइगो के सहयोग से प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जाएगा। सभी हितधारकों को टीबी की शीघ्र पहचान में तेजी लाने के लिए एंटीईपी में शामिल किया गया है और संभावित टीबी मामलों की पहचान करने के लिए कफ सिरप की बिक्री को ट्रैक करने के लिए निगरानी तंत्र और रिपोर्ट करने के लिए प्रदाता स्तर पर एक डिजिटल रूप से सक्षम निगरानी प्रणाली लागू की गई है।