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Hamirpur (Himachal) News: भक्तों को शिव विवाह और निष्काम भक्ति का प्रसंग सुनाया
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डिडवीं टिक्कर में आयोजित शिव पुराण कथा के पांचवें दिन सुनाई कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत डिडवीं टिक्कर में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन पंडित पीयूष ने भक्तों को शिव विवाह और निष्काम भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि एक बार नारद ने भगवान विष्णु से कहा कि भगवान मेरे से बड़ा भक्त आपका इस दुनिया में कोई नहीं हो सकता। भगवान को लगा कि नारद के मन में अपने भक्त होने का अहंकार हो गया है। वह बोले तो नहीं पर नारद को एक किसान के घर के पास ले गए। सुबह का समय था। किसान उठा। भगवान हरि का नाम लिया। बैलों को चारा डाला और फिर खेत जोतने लगा। जब दोपहर को खाना खाने लगा तो फिर एक एक बार हरि का नाम लिया तथा खाना खाया। खेत जोता, शाम को घर आया। बैलों को चारा दिया। हाथ पांव धोकर फिर हरि का नाम लिया और भोजन करके सो गया। यह दृश्य नारद ने भी देखा कुछ दिन बाद विष्णु ने नारद को एक तेल से भरा पात्र दिया और कहा नारद इस पात्र को संभाल कर रखना। इस में से तेल की एक बूंद न गिरने पाए। नारद तेल का पात्र लेकर घूमता रहा पर सारा ध्यान तेल पर ही रहा। शाम को जब भगवान ने पूछा नारद मेरा नाम कितने बार लिया तो नारद चौंके, भगवान के नाम की एक बार भी याद नहीं आई, सारा ध्यान तो तेल पर ही रहा। तब विष्णु भगवान बोले-नारद उस किसान को देखा। इतना काम होते हुए भी तीन बार उसने निस्वार्थ भाव से मेरा नाम लिया तो अब बोलो मेरा बड़ा भक्त कौन हैं आप या वह किसान। उन्होंने उसके बाद वह प्रसंग भी सुनाया कि काम के वाणों के प्रभाव से शिव और पार्वती का विवाह हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत डिडवीं टिक्कर में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन पंडित पीयूष ने भक्तों को शिव विवाह और निष्काम भक्ति का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि एक बार नारद ने भगवान विष्णु से कहा कि भगवान मेरे से बड़ा भक्त आपका इस दुनिया में कोई नहीं हो सकता। भगवान को लगा कि नारद के मन में अपने भक्त होने का अहंकार हो गया है। वह बोले तो नहीं पर नारद को एक किसान के घर के पास ले गए। सुबह का समय था। किसान उठा। भगवान हरि का नाम लिया। बैलों को चारा डाला और फिर खेत जोतने लगा। जब दोपहर को खाना खाने लगा तो फिर एक एक बार हरि का नाम लिया तथा खाना खाया। खेत जोता, शाम को घर आया। बैलों को चारा दिया। हाथ पांव धोकर फिर हरि का नाम लिया और भोजन करके सो गया। यह दृश्य नारद ने भी देखा कुछ दिन बाद विष्णु ने नारद को एक तेल से भरा पात्र दिया और कहा नारद इस पात्र को संभाल कर रखना। इस में से तेल की एक बूंद न गिरने पाए। नारद तेल का पात्र लेकर घूमता रहा पर सारा ध्यान तेल पर ही रहा। शाम को जब भगवान ने पूछा नारद मेरा नाम कितने बार लिया तो नारद चौंके, भगवान के नाम की एक बार भी याद नहीं आई, सारा ध्यान तो तेल पर ही रहा। तब विष्णु भगवान बोले-नारद उस किसान को देखा। इतना काम होते हुए भी तीन बार उसने निस्वार्थ भाव से मेरा नाम लिया तो अब बोलो मेरा बड़ा भक्त कौन हैं आप या वह किसान। उन्होंने उसके बाद वह प्रसंग भी सुनाया कि काम के वाणों के प्रभाव से शिव और पार्वती का विवाह हुआ।