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Hamirpur (Himachal) News: बड़सर अस्पताल में दो वर्ष से शिशुरोग विशेषज्ञ नहीं, बच्चों काे नहीं मिल रहा उपचार
Sun, 06 Jul 2025 12:43 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 06 Jul 2025 12:43 AM IST
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बड़सर(हमीरपुर)। बरसात के मौसम में इन दिनों वायरल सहित संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन सिविल अस्पताल बड़सर में पिछले दो वर्ष से शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त पड़ा है, जिससे शिशु ओपीडी काफी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञ न होने से अस्पताल में शिशु ओपीडी को बंद किया गया है। ऐसे में आपात स्थिति में बच्चों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों को बच्चों का उपचार करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 450 के करीब ओपीडी होती है। तीन जिलों की सीमाओं पर स्थित होने से यहां पर सैकड़ों लोग उपचार व स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उपचार न मिलने पर उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों में मनोज चौहान, हितेंद्र ठाकुर, सर्वजीत सिंह, वीना चौहान, सुरेंद्र चौहान, रीना व ममता चौहान आदि ने कहा कि बरसात में बच्चे विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके चलते अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 लोग बच्चों को लेकर पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से मेडिसिन विशेषज्ञ दवाई देकर बच्चों को रेफर कर रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सिविल अस्पताल में दो वर्ष पहले तक शिशु की देखभाल व उपचार किया जा रहा था लेकिन तबादले के बाद अस्पताल में कोई भी विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया, जिससे अब मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
कोट
हाल ही में कार्यभार संभाला है। इस बारे में सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग को अवगत करवाया जाएगा, ताकि अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाया जा सके।
-अरविंद टंडन, खंड चिकित्सा अधिकारी, बड़सर
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विशेषज्ञ न होने से अस्पताल में शिशु ओपीडी को बंद किया गया है। ऐसे में आपात स्थिति में बच्चों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे अभिभावकों को बच्चों का उपचार करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 450 के करीब ओपीडी होती है। तीन जिलों की सीमाओं पर स्थित होने से यहां पर सैकड़ों लोग उपचार व स्वास्थ्य जांच के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उपचार न मिलने पर उन्हें मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों में मनोज चौहान, हितेंद्र ठाकुर, सर्वजीत सिंह, वीना चौहान, सुरेंद्र चौहान, रीना व ममता चौहान आदि ने कहा कि बरसात में बच्चे विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। इसके चलते अस्पताल में प्रतिदिन 40 से 50 लोग बच्चों को लेकर पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से मेडिसिन विशेषज्ञ दवाई देकर बच्चों को रेफर कर रहे हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सिविल अस्पताल में दो वर्ष पहले तक शिशु की देखभाल व उपचार किया जा रहा था लेकिन तबादले के बाद अस्पताल में कोई भी विशेषज्ञ नियुक्त नहीं किया गया, जिससे अब मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
कोट
हाल ही में कार्यभार संभाला है। इस बारे में सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग को अवगत करवाया जाएगा, ताकि अस्पताल में बच्चों का उपचार करवाया जा सके।
-अरविंद टंडन, खंड चिकित्सा अधिकारी, बड़सर