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आरडीजी की प्रदेश सरकार को पहले से थी जानकारी : राजेंद्र
Thu, 05 Feb 2026 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 05 Feb 2026 12:54 AM IST
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कहा, वित्तीय अनुशासन की बजाय मानमाने खर्चों की प्रदेश सरकार ने अपनाई नीति
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। भाजपा के प्रदेश प्रमुख प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह राणा ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर राज्य सरकार का शोर पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीतिक है।
उन्होंने कहा कि यह पहले से ही स्पष्ट रूप से अधिसूचित था कि 16वें वित्त आयोग के निर्णय के बाद यह अनुदान चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगा। राणा ने कहा कि यह जानकारी मुख्यमंत्री और उनके पूरे प्रशासनिक तंत्र को पहले से थी, फिर भी राज्य को वित्तीय अनुशासन में लाने के बजाय मनमाने खर्चों की नीति अपनाई गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की महिलाएं आज भी 1500 रुपये मासिक सम्मान राशि का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने कार्यकाल में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लेकर प्रदेश के हर नागरिक पर लगभग दो लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
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राणा ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का उपयोग वेतन और पेंशन भुगतान में किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि केंद्र पर आरोप लगाने से पहले मुख्यमंत्री को खर्च किए गए धन का उपयोगिता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। भाजपा के प्रदेश प्रमुख प्रवक्ता एवं सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह राणा ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर राज्य सरकार का शोर पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और राजनीतिक है।
उन्होंने कहा कि यह पहले से ही स्पष्ट रूप से अधिसूचित था कि 16वें वित्त आयोग के निर्णय के बाद यह अनुदान चरणबद्ध तरीके से समाप्त हो जाएगा। राणा ने कहा कि यह जानकारी मुख्यमंत्री और उनके पूरे प्रशासनिक तंत्र को पहले से थी, फिर भी राज्य को वित्तीय अनुशासन में लाने के बजाय मनमाने खर्चों की नीति अपनाई गई।
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उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की महिलाएं आज भी 1500 रुपये मासिक सम्मान राशि का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने कार्यकाल में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लेकर प्रदेश के हर नागरिक पर लगभग दो लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया है।
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राणा ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जारी धनराशि का उपयोग वेतन और पेंशन भुगतान में किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि केंद्र पर आरोप लगाने से पहले मुख्यमंत्री को खर्च किए गए धन का उपयोगिता प्रमाणपत्र सार्वजनिक करना चाहिए।