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Hamirpur (Himachal) News: सीता स्वयंवर के मंचन ने मोहा हर किसी का दिल
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श्री राम नाटक क्लब चौरी में हुआ आयोजन
अहिल्या प्रभु श्री राम के पैर लगने से दोबारा बनी नारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। श्री राम नाटक क्लब चौरी की ओर से चलाई जा रही रामलीला में तीसरे दिन अहिल्या जो गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर की शिला बन गई थीं, का दृश्य दिखाया गया। अहिल्या प्रभु श्री राम के पैर लगने से दोबारा नारी बन जाती हैं। अगले दृश्य में राजा जनक सीता स्वयंवर को लेकर विभिन्न देशों से आए राजा महाराजाओं द्वारा धनुष न तोड़ पाने के कारण मायूस हो गए। उन्होंने क्रोधित होकर कहा कि मुझे लगता है कि पृथ्वी बहादुरों से खाली हो गई है। इस पर क्रोधित होकर लक्ष्मण ने राजा जनक को बहुत भला-बुरा कहा। प्रभु श्री राम ने लक्ष्मण को शांत कराया। उन्होंने लक्ष्मण से कहा कि लक्ष्मण राजा जनक ने कायर उनको कहा जिन्होंने धनुष को चिल्ला नहीं चढ़ाया।
आपने तो धनुष को हाथ भी नहीं लगाया। आप गुस्सा क्यों हो रहे हो। इस पर महर्षि विश्वामित्र ने राम से कहा बेटा राम उठो, अब देर मत करो और इस स्वयंवर की रस्म को पूरा करो। प्रभु श्री राम ने महर्षि की आज्ञा मानकर धनुष को नतमस्तक होकर उठाया और उसे तोड़ डाला। इसके बाद राजा जनक ने मंत्री से कहा कि शीघ्र अयोध्या के लिए दूत रवाना कर दिया जाए और महाराज दशरथ को बारात लेकर आने का न्योता दिया जाए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ऊहल स्कूल के प्रधानाचार्य सुनील कुमार रहे।
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अहिल्या प्रभु श्री राम के पैर लगने से दोबारा बनी नारी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। श्री राम नाटक क्लब चौरी की ओर से चलाई जा रही रामलीला में तीसरे दिन अहिल्या जो गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर की शिला बन गई थीं, का दृश्य दिखाया गया। अहिल्या प्रभु श्री राम के पैर लगने से दोबारा नारी बन जाती हैं। अगले दृश्य में राजा जनक सीता स्वयंवर को लेकर विभिन्न देशों से आए राजा महाराजाओं द्वारा धनुष न तोड़ पाने के कारण मायूस हो गए। उन्होंने क्रोधित होकर कहा कि मुझे लगता है कि पृथ्वी बहादुरों से खाली हो गई है। इस पर क्रोधित होकर लक्ष्मण ने राजा जनक को बहुत भला-बुरा कहा। प्रभु श्री राम ने लक्ष्मण को शांत कराया। उन्होंने लक्ष्मण से कहा कि लक्ष्मण राजा जनक ने कायर उनको कहा जिन्होंने धनुष को चिल्ला नहीं चढ़ाया।
आपने तो धनुष को हाथ भी नहीं लगाया। आप गुस्सा क्यों हो रहे हो। इस पर महर्षि विश्वामित्र ने राम से कहा बेटा राम उठो, अब देर मत करो और इस स्वयंवर की रस्म को पूरा करो। प्रभु श्री राम ने महर्षि की आज्ञा मानकर धनुष को नतमस्तक होकर उठाया और उसे तोड़ डाला। इसके बाद राजा जनक ने मंत्री से कहा कि शीघ्र अयोध्या के लिए दूत रवाना कर दिया जाए और महाराज दशरथ को बारात लेकर आने का न्योता दिया जाए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ऊहल स्कूल के प्रधानाचार्य सुनील कुमार रहे।
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