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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   The situation of hanging the lock reached in six schools of less number of districts

Hamirpur (Himachal) News: कम संख्या वाले जिले के छह स्कूलों में पहुंची ताला लटकने की नौबत

Tue, 03 Jan 2023 11:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 03 Jan 2023 11:33 PM IST
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हमीरपुर। विद्यार्थियों की कम संख्या वाले जिले की छह प्राथमिक पाठशालाओं में ताला लटकने की नौबत पहुंच गई है। इन पाठशालों में विद्यार्थियों की संख्या एक से तीन के बीच है। शिक्षा विभाग ने सरकार के निर्देशानुसार कम संख्या वाले स्कूलों की सूची शिक्षा निदेशालय भेज दी है। इसके तहत अब प्रदेश सरकार इन स्कूलों को चलाए रखने या बंद करने पर अपना फैसला लेगी। वर्तमान में राजकीय प्राथमिक पाठशाला भटवाड़ा में दो, बीड़ीधार में दो, क्कडय़ार में दो, चनेहड़ दो, टूह स्कूल और भरनोट में एक-एक विद्यार्थी दाखिल है। इस कारण इन स्कूलों में कभी भी ताला लटक सकता है।
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वहीं दूसरी ओर जिला के 64 स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या एक से दस के बीच है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने से विद्यार्थियों में प्रतिस्पर्धा की भावना भी खत्म हो रही है। इस कारण स्कूल में दाखिल यह विद्यार्थी भी निजी स्कूलों की तरफ रूख कर रहे हैं। अभिभावकों सरोज कुमारी, सुमन देवी, रमा देवी और राकेश कुमार आदि ने कहा कि उन्होंने सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला करवाया है। लेकिन स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम होने से वह लगातार पढ़ाई में पिछड़ते जा रहे हैं। छोटी कक्षाओं में बच्चे प्रतिस्पर्धा और खेल-खेल में पढ़ाई करना सीखते हैं। लेकिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने के कारण न ही बच्चे खेल पा रहे हैं और न ही अच्छे से पढ़ाई कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इसी अंतराल से स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटती रही तो शीघ्र आधुनिक सुविधाओं वाले इन स्कूलों में ताला लटक सकता है।
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इस बारे में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण राकेश ने कहा कि शिक्षा निदेशालय को कम संख्या वाले विद्यार्थियों की सूची भेज दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से प्री-प्राइमरी से लेकर बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्कूल में निशुल्क आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। लेकिन अधिकांश लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिल करवा रहे हैं। जिससे सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
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