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Hamirpur (Himachal) News: चार वर्षों से नेत्र जांच तकनीशियन का पद खाली, मरीज परेशान
Wed, 04 Feb 2026 01:02 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 04 Feb 2026 01:02 AM IST
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बड़सर(हमीरपुर)। सिविल अस्पताल बड़सर में नेत्र जांच तकनीशियन का पद चार वर्षों से रिक्त है। इस कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को खासी परेशानी हो रही है। क्षेत्र के लोगों को नियमित नेत्र जांच सुविधा नहीं मिल पा रही है।
सिविल अस्पताल बड़सर में पहले मदन गोपाल नेत्र जांच तकनीशियन के रूप में कार्यरत थे, जिनकी 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्ति हो गई थी। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब तक इस पद पर किसी भी तकनीशियन की स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में नेत्र जांच सुविधा महज मंगलवार और बुधवार के दिन ही उपलब्ध रहती है।
अस्पताल में एक ऑप्थैल्मिक तकनीशियन है, लेकिन मंगलवार और बुधवार के अलावा अन्य दिनों में उनकी ड्यूटी भोटा अस्पताल में रहती है। ऐसे में अधिकतर दिनों में बड़सर अस्पताल में आने वाले मरीजों को बिना नेत्र जांच के ही लौटना पड़ता है। क्षेत्र के मरीज या तो निजी अस्पताल का रंख करते हैं या मेडिकल कॉलेज हमीरपुर आना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज पहुंचने के लिए 30 किलोमीटर दूर का सफर करना पड़ता है और निजी अस्पतालों में इलाज महंगा पड़ता है। ऐसे में नेत्ररोग मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों में देव राज, रमना देवी, शीला देवी आदि ने कहा कि आंखों से जुड़ी सामान्य समस्याओं के लिए निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है या फिर हमीरपुर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
कोट:
नेत्र जांच तकनीशियन के रिक्त पद का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा चुका है। जैसे ही उच्च स्तर से निर्देश प्राप्त होंगे, इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अरविंद टंडन, बीएमओ बड़सर
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सिविल अस्पताल बड़सर में पहले मदन गोपाल नेत्र जांच तकनीशियन के रूप में कार्यरत थे, जिनकी 31 दिसंबर 2021 को सेवानिवृत्ति हो गई थी। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब तक इस पद पर किसी भी तकनीशियन की स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। अस्पताल में नेत्र जांच सुविधा महज मंगलवार और बुधवार के दिन ही उपलब्ध रहती है।
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अस्पताल में एक ऑप्थैल्मिक तकनीशियन है, लेकिन मंगलवार और बुधवार के अलावा अन्य दिनों में उनकी ड्यूटी भोटा अस्पताल में रहती है। ऐसे में अधिकतर दिनों में बड़सर अस्पताल में आने वाले मरीजों को बिना नेत्र जांच के ही लौटना पड़ता है। क्षेत्र के मरीज या तो निजी अस्पताल का रंख करते हैं या मेडिकल कॉलेज हमीरपुर आना पड़ता है।
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मेडिकल कॉलेज पहुंचने के लिए 30 किलोमीटर दूर का सफर करना पड़ता है और निजी अस्पतालों में इलाज महंगा पड़ता है। ऐसे में नेत्ररोग मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों में देव राज, रमना देवी, शीला देवी आदि ने कहा कि आंखों से जुड़ी सामान्य समस्याओं के लिए निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ता है या फिर हमीरपुर जिला अस्पताल जाना पड़ता है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
कोट:
नेत्र जांच तकनीशियन के रिक्त पद का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जा चुका है। जैसे ही उच्च स्तर से निर्देश प्राप्त होंगे, इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. अरविंद टंडन, बीएमओ बड़सर