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Hamirpur (Himachal) News: रमजान का माह शुरू, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रखे रोजे
Sat, 21 Feb 2026 12:32 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 21 Feb 2026 12:32 AM IST
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वन्ह गांव में रमजान के मौके पर रोजा खोलने के लिए एक दूसरे को पकवान बांटते समुदाय के लोग। संवाद
रंगस(हमीरपुर)। रमजान का माह शुरू होते ही जिले के मुस्लिम समुदाय के लोगों के रोजे शुरू हो गए हैं। 18 फरवरी को देर शाम चांद का दीदार करते ही रस्में शुरू हो गई थीं।
वीरवार 19 फरवरी को सुबह 5:38 बजे पर पहला रोजा शुरू हुआ और शाम को 6:19 बजे पर रोजा खोला गया। रंगस कस्बा के वन्ह गांव के निवासी व मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष जान मोहम्मद, शिक्षक इस्लाम मोहम्मद, मौला दीन और रफीक मोहम्मद ने कहा कि सभी गांववासियों ने गांव की मस्जिद में बैठकर रोजे को विधिवत रूप से खोला।
इस दौरान सबने अपने पकवान या फल आदि एक-दूसरे को बांटे और रमजान की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि रोजा खोलने के बाद सबने तरावीह की नवाज अदा की, जिसका अपना अलग ही महत्व है।
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रोजे के दौरान किसी को भी खाना खाने या पानी पीने और अपना थूक तक निगलने की अनुमति नहीं होती है। 12 वर्ष आयु से ऊपर के सब लोग रोजा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार के वार्षिक कैलेंडर के अनुसार हर सुबह प्रतिदिन एक मिनट पूर्व रोजा शुरू होगा और एक मिनट देरी से खुलेगा।
उन्होंने कहा कि तीस दिन तक लगातार रोजा रखने के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। उस दिन सभी लोग अपने-अपने घर में मीठा पकवान या मिठाई आदि बनाकर एक-दूसरे में बांटकर ईद को मनाएंगे और एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देंगे।
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वीरवार 19 फरवरी को सुबह 5:38 बजे पर पहला रोजा शुरू हुआ और शाम को 6:19 बजे पर रोजा खोला गया। रंगस कस्बा के वन्ह गांव के निवासी व मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रांतीय उपाध्यक्ष जान मोहम्मद, शिक्षक इस्लाम मोहम्मद, मौला दीन और रफीक मोहम्मद ने कहा कि सभी गांववासियों ने गांव की मस्जिद में बैठकर रोजे को विधिवत रूप से खोला।
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इस दौरान सबने अपने पकवान या फल आदि एक-दूसरे को बांटे और रमजान की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि रोजा खोलने के बाद सबने तरावीह की नवाज अदा की, जिसका अपना अलग ही महत्व है।
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रोजे के दौरान किसी को भी खाना खाने या पानी पीने और अपना थूक तक निगलने की अनुमति नहीं होती है। 12 वर्ष आयु से ऊपर के सब लोग रोजा करते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार के वार्षिक कैलेंडर के अनुसार हर सुबह प्रतिदिन एक मिनट पूर्व रोजा शुरू होगा और एक मिनट देरी से खुलेगा।
उन्होंने कहा कि तीस दिन तक लगातार रोजा रखने के बाद ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाएगा। उस दिन सभी लोग अपने-अपने घर में मीठा पकवान या मिठाई आदि बनाकर एक-दूसरे में बांटकर ईद को मनाएंगे और एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देंगे।