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Hamirpur (Himachal) News: नादौन में बनेगी जिले की पहली मत्स्य हैचरी
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हमीरपुर। मत्स्य विभाग जिले में एक हैचरी का निर्माण करवाने जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से 15 लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। हैचरी के निर्माण पर 25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। रैल के पास बफड़ीं में 2 हेक्टेयर भूमि में हैचरी का निर्माण करवाया जा रहा है। इस हैचरी से तैयार होने वाले मछली के बीज को जिला हमीरपुर के मत्स्य पालक व मत्स्य विभाग जरूरत पड़ने पर खरीदेगा। मत्स्य विभाग ने निजी हैचरी के निर्माण कार्य को मार्च 2024 तक पूरा करवाने का लक्ष्य रखा है।
इस हैचरी में भारतीय मेजर कॉर्प मछली का बीज और कॉमन कॉर्प का बीज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा राहु, कतला, निरगल और महासीर मछली का बीज भी इस हैचरी में तैयार किया जाएगा। मत्स्य विभाग यहां पर उत्पादित होने वाली मछली के लिए एक विक्रय केंद्र भी स्थापित करेगा। इससे मछली खाने वाले लोगों को ताजी मछली जिले में ही मिलेगी। हैचरी से हर वर्ष करीब चार लाख मछली का बीज तैयार किया जाएगा। हैचरी में 50 तालाबोंं को बनवाया जाएगा ताकि इन तालाबों में मछली के बीज को डाला जा सके।
बाक्स
प्रारंभ में नालागढ़ हैचरी से लाया जाएगा मछली का बीज
हमीरपुर की इस हैचरी के लिए प्रारंभ में नालागढ़ स्थित हैचरी से बीज लाया जाएगा। इसके बाद यहां पर बीज का उत्पादन अपने आप ही शुरू हो जाएगा। हालांकि, मत्स्य विभाग ने तीन दिन पूर्व जो बीज ब्यास नदी और स्थानीय खड्डों व नालों में डाला, उसे बंगाणा की हैचरी से लाया गया था। इसके लिए विभाग की ओर से छह लाख रुपये खर्च किए गए थे।
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जिला की पहली हैचरी का हो रहा निर्माण
जिला मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अजय कुलदीप ने बताया कि जिले में पहली हैचरी का निर्माण सातवें नवरात्र को शुरू होने जा रहा है। निजी हैचरी का निर्माण बफड़ीं में दो हेक्टेयर भूमि पर किया जा रहा है। इस पर 25 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें विभाग की ओर से 15 लाख की सब्सिडी दी जा रही है।
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इस हैचरी में भारतीय मेजर कॉर्प मछली का बीज और कॉमन कॉर्प का बीज तैयार किया जाएगा। इसके अलावा राहु, कतला, निरगल और महासीर मछली का बीज भी इस हैचरी में तैयार किया जाएगा। मत्स्य विभाग यहां पर उत्पादित होने वाली मछली के लिए एक विक्रय केंद्र भी स्थापित करेगा। इससे मछली खाने वाले लोगों को ताजी मछली जिले में ही मिलेगी। हैचरी से हर वर्ष करीब चार लाख मछली का बीज तैयार किया जाएगा। हैचरी में 50 तालाबोंं को बनवाया जाएगा ताकि इन तालाबों में मछली के बीज को डाला जा सके।
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प्रारंभ में नालागढ़ हैचरी से लाया जाएगा मछली का बीज
हमीरपुर की इस हैचरी के लिए प्रारंभ में नालागढ़ स्थित हैचरी से बीज लाया जाएगा। इसके बाद यहां पर बीज का उत्पादन अपने आप ही शुरू हो जाएगा। हालांकि, मत्स्य विभाग ने तीन दिन पूर्व जो बीज ब्यास नदी और स्थानीय खड्डों व नालों में डाला, उसे बंगाणा की हैचरी से लाया गया था। इसके लिए विभाग की ओर से छह लाख रुपये खर्च किए गए थे।
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जिला की पहली हैचरी का हो रहा निर्माण
जिला मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अजय कुलदीप ने बताया कि जिले में पहली हैचरी का निर्माण सातवें नवरात्र को शुरू होने जा रहा है। निजी हैचरी का निर्माण बफड़ीं में दो हेक्टेयर भूमि पर किया जा रहा है। इस पर 25 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें विभाग की ओर से 15 लाख की सब्सिडी दी जा रही है।