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Hamirpur (Himachal) News: केसीसी बैंक के पक्ष में आया फैसला, अदालत ने फर्म से 25.72 लाख रुपये वसूलने के दिए आदेश
Mon, 03 Nov 2025 12:23 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 03 Nov 2025 12:23 AM IST
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हमीरपुर। सीनियर सिविल जज हमीरपुर की अदालत ने कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (केसीसी बैंक) की ओर से दायर ऋण वसूली वाद में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अब फर्म को ब्याज सहित बैंक का कर्ज चुकाना होगा।
अदालत ने फर्म और अन्य के खिलाफ 25,72,665 रुपये की वसूली का आदेश दिया है। इस राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज 2 जनवरी, 2020 से अदायगी तक देने का निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला केसीसी बैंक जलाड़ी शाखा, नादौन से जुड़ा हुआ है।
मामला 2 मई 2014 को दर्ज हुए उस कर्ज से जुड़ा है, जिसमें नादौन उपमंडल के भरमोटी क्षेत्र की एक फर्म ने बैंक से 25 लाख का ऋण लिया था। बैंक का आरोप था कि उधारकर्ताओं ने समय पर किस्तें जमा नहीं कीं और उनका खाता एनपीए घोषित करना पड़ा।
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बैंक की ओर से अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने पक्ष रखा, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता नीलम ठाकुर ने पैरवी की। गवाहों की सुनवाई और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने पाया कि बैंक ने अपने दस्तावेजों और गवाहों के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि ऋण की किस्तें समय पर नहीं चुकाई गईं।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। लिहाज़ा अदालत ने फैसला बैंक के पक्ष में सुनाते हुए कहा कि केसीसी बैंक वसूली का हकदार है। यह आदेश वरिष्ठ सिविल जज सूर्य प्रकाश ने सुनाया। आदेश के अनुसार प्रतिवादी पक्ष को ब्याज सहित पूरी राशि बैंक को चुकानी होगी।
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अदालत ने फर्म और अन्य के खिलाफ 25,72,665 रुपये की वसूली का आदेश दिया है। इस राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज 2 जनवरी, 2020 से अदायगी तक देने का निर्देश भी दिए गए हैं। यह मामला केसीसी बैंक जलाड़ी शाखा, नादौन से जुड़ा हुआ है।
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मामला 2 मई 2014 को दर्ज हुए उस कर्ज से जुड़ा है, जिसमें नादौन उपमंडल के भरमोटी क्षेत्र की एक फर्म ने बैंक से 25 लाख का ऋण लिया था। बैंक का आरोप था कि उधारकर्ताओं ने समय पर किस्तें जमा नहीं कीं और उनका खाता एनपीए घोषित करना पड़ा।
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बैंक की ओर से अधिवक्ता विक्रांत ठाकुर ने पक्ष रखा, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता नीलम ठाकुर ने पैरवी की। गवाहों की सुनवाई और सबूतों की जांच के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने पाया कि बैंक ने अपने दस्तावेजों और गवाहों के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया कि ऋण की किस्तें समय पर नहीं चुकाई गईं।
वहीं, प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया। लिहाज़ा अदालत ने फैसला बैंक के पक्ष में सुनाते हुए कहा कि केसीसी बैंक वसूली का हकदार है। यह आदेश वरिष्ठ सिविल जज सूर्य प्रकाश ने सुनाया। आदेश के अनुसार प्रतिवादी पक्ष को ब्याज सहित पूरी राशि बैंक को चुकानी होगी।